यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 07, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सिलिकोसिस के प्रसार पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती, NGT को दिया निर्देश
Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने सिलकोसिस के प्रसार पर सख्ती दिखाते हुए एनजीटी को निर्देश दिया है कि वह इसके ...और पढ़ें

HighLights
- कहा- प्रभावित श्रमिकों को उचित मुआवजा प्रक्रिया की निगरानी करे एनएचआरसी।
- लंबे समय तक सिलिका कणों के शरीर में जाने से होती है यह लाइलाज बीमारी।
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को देशभर में सिलिकोसिस के खतरे वाले उद्योगों एवं कारखानों के असर की निगरानी करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्यों के संबंधित प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इस मुद्दे पर उसके पूर्व के निर्देशों का अनुपालन करें।
सिलिकोसिस फेफड़ों की ऐसी लाइलाज बीमारी है, जो सिलिका के कणों के लंबे समय तक शरीर के अंदर जाने से होती है। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस प्रसन्ना भालचंद्र वराले की पीठ ने कहा कि गठित किए गए वैधानिक निकाय कानून के अनुपालन की बेहतर निगरानी और देखरेख करने की स्थिति में होंगे।
कोर्ट ने मुआवजे की प्रक्रिया पर जताई चिंता
पीठ ने एनजीटी को भी निर्देश दिया कि ऐसे उद्योगों एवं कारखानों द्वारा सिलिकोसिस के प्रसार को रोकने के लिए अतिरिक्त आवश्यक कदम उठाए। पीठ ने कहा, 'चिंता का दूसरा पहलू यह सुनिश्चित करना है कि प्रभावित श्रमिकों या उनके स्वजन को जल्द से जल्द उचित मुआवजा प्राप्त हो। इस संबंध में हम राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को संबंधित राज्यों की मुआवजा प्रक्रिया की निगरानी का निर्देश देते हैं।'
ESIC को दिया निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कर्मचारी राज्य बीमा निगम और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों को भी निर्देश देते हुए कहा कि वे एनएचआरसी के निर्देशों का पालन करें और यह सुनिश्चित करने के लिए उनके साथ सहयोग करें कि मुआवजा वितरण प्रक्रिया कुशलतापूर्वक एवं अविलंब पूरी की जाए।
शीर्ष अदालत ने अपनी रजिस्ट्री को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि इस मामले से जुड़ी सभी प्रासंगिक रिपोर्टें एवं हलफनामे एनजीटी एवं एनएचआरसी को भेजे जाएं, ताकि वे अपनी जिम्मेदारी कुशलतापूर्वक एवं तेजी से निभा सकें। इसके साथ ही अदालत ने एनजीओ पीपुल्स राइट्स एंड सोशल रिसर्च सेंटर की 2006 की याचिका निपटा दी।
