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135 साल पुरानी लाइब्रेरी और 8.5 लाख किताबों का क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

Published: Sun, 04 Oct 2026 09:46 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने शास्त्री भवन से 135 साल पुरानी केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सीएसएल) को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के तहत स्थानांतरित करने के मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है।

135 साल पुरानी लाइब्रेरी का क्या होगा।

135 साल पुरानी लाइब्रेरी का क्या होगा।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय स्थानांतरण पर स्वतः संज्ञान लिया।

  2. 135 साल पुरानी लाइब्रेरी में 8.5 लाख से अधिक दुर्लभ किताबें।

  3. सेंट्रल विस्टा के तहत ध्वस्त होने वाली लाइब्रेरी के भविष्य पर चिंता।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने नई दिल्ली के शास्त्री भवन से 135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय (सीएसएल) को स्थानांतरित करने के प्रस्तावित मामले पर स्वत: संज्ञान लिया है। इस पुस्तकालय को सेंट्रल विस्टा पुनर्विकास के तहत ध्वस्त किया जाना है। जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की पीठ सोमवार (पांच अक्टूबर) को इस मामले पर सुनवाई करेगी।

केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय की स्थापना 1891 में कोलकाता (तत्कालीन कलकत्ता) में इंपीरियल सेक्रेटारिएट लाइब्रेरी के रूप में हुई थी। 1911 में जब ब्रिटिश भारत की राजधानी दिल्ली लाई गई, तब इस लाइब्रेरी को भी दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। 1969 से यह शास्त्री भवन में स्थित है।

दूसरा सबसे बड़ा केंद्रीय सरकारी पुस्तकालय

यह कोलकाता के राष्ट्रीय पुस्तकालय के बाद दूसरा सबसे बड़ा केंद्रीय सरकारी पुस्तकालय है। वर्तमान में यह पुस्तकालय चार मंजिलों में लगभग 5500 मीटर वर्गक्षेत्र में फैला हुआ है। इसमें दुर्लभ पुस्तकों, सरकारी प्रकाशनों, आधिकारिक अभिलेखों और राजपत्रों सहित 8.5 लाख से अधिक पुस्तकों का संग्रह है।

संस्कृति मंत्रालय ने शुरुआत में पुनर्विकसित केंद्रीय सचिवालय में पुस्तकालय के लिए लगभग 5466 वर्ग मीटर जगह की मांग की थी। लेकिन, आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के अंतर्गत संपदा निदेशालय द्वारा कर्तव्य भवन-2 में केवल 300 वर्ग मीटर के दो कमरे पुस्तकालय के लिए आवंटित करने का प्रस्ताव रखे जाने के बाद इसके भविष्य को लेकर चिंताएं उत्पन्न हो गईं।

पुस्तकालय में दुर्लभ किताबों का संग्रह मौजूद

संस्कृति मंत्रालय ने फरवरी में सूचित किया कि प्रस्तावित स्थान पुस्तकालय के संपूर्ण संग्रह और सुविधाओं को रखने के लिए अपर्याप्त था और आवंटित स्थान पर पूर्ण स्थानांतरण संभव नहीं था। इस पुस्तकालय में न केवल दुर्लभ किताबों का संग्रह मौजूद है, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अब तक देश की प्रगति और समकालीन ऐतिहासिक घटनाक्रमों का दस्तावेज भी यहां है।

पीटीआई के अनुसार, आवास मंत्रालय ने इस बात से इनकार किया है कि नए सेंट्रल विस्टा प्लान में लाइब्रेरी के लिए कोई जगह नहीं दी गई है। मंत्रालय ने एक्स पर लिखा कि कर्तव्य पथ पुनर्विकास योजना में लाइब्रेरी के लिए जगह दी गई है। इसके निर्माण की जरूरी प्रक्रिया चल रही है।