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नोएडा DM मेधा रूपम को बड़ी राहत, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर लगाई रोक

Published: Wed, 23 Sep 2026 11:30 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम को बड़ी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाई ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने डीएम मेधा रूपम को बड़ी राहत दी

सुप्रीम कोर्ट ने डीएम मेधा रूपम को बड़ी राहत दी

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट से गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी (डीएम) मेधा रूपम को बड़ी राहत मिली है।शीर्ष अदालत ने बुधवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें नोएडा में गत अप्रैल में हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रा आकृति चौधरी को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में रखने पर उन पर पांच लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

यह राशि उनकी सेलरी से काटकर छात्रा को देने का निर्देश दिया गया था। रूपम ने हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जुर्माने के आदेश पर रोक लगाई

जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने रूपम की याचिका पर छात्रा और अन्य को नोटिस जारी किया और चौधरी की हिरासत को रद करने वाले हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। शीर्ष अदालत ने रूपम और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल दो अलग-अलग याचिकाओं पर अंतरिम आदेश पारित किया।

पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश में डीएम के खिलाफ की गईं टिप्पणियों पर भी रोक लगा दी। सुनवाई के दौरान पीठ ने उत्तर प्रदेश की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी और रूपम की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलों को सुना।

उन्होंने कहा कि डीएम ने एसएचओ, डीसीपी और आयुक्त के जरिये उन तक पहुंची सामग्री के आधार पर काम किया। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि रासुका सलाहकार बोर्ड ने बाद में हिरासत की समीक्षा की थी।

बता दें कि दो सितंबर को हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में स्नातक की पढ़ाई कर चुकी आकृति चौधरी की हिरासत रद कर दी थी। 25 वर्षीय आकृति को अप्रैल में नोएडा में हुए मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के संबंध में रासुका के तहत हिरासत में लिया गया था।

'डीएम को अकेले कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता'

एएनआइ के अनुसार, सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा, "रासुका लगाने की प्रक्रिया कई स्तरों पर चली थी तो डीएम को अकेले कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

हम उन्हें अलग-थलग करके पांच लाख रुपये का जुर्माना कैसे लगा सकते हैं।" रोहतगी ने यह दलील दी कि मजदूरों के हिंसक विरोध प्रदर्शन के बाद छात्रा को हिरासत में लिया गया था।

उन्होंने वाट्सएप समेत मोबाइल फोन से मिली जानकारी का भी जिक्र किया। अधिकारियों ने इसी जानकारी के आधार पर आरोप लगाया था कि चौधरी उकसावे वाली गतिविधियों में शामिल थी।