विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'इस रफ्तार पर तो घोंघा भी सवाल उठा सकता है', दीवानी मामलों की धीमी सुनवाई पर सुप्रीम कोर्ट नाराज

Published: Thu, 09 Jul 2026 10:29 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने एक दीवानी मामले की धीमी सुनवाई पर हैरानी जताते हुए कहा कि इस रफ्तार पर तो घोंघा भी सवाल उठा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने दीवानी मामले की धीमी गति पर जताई हैरानी (फोटो-पीटीआई)

सुप्रीम कोर्ट ने दीवानी मामले की धीमी गति पर जताई हैरानी (फोटो-पीटीआई)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने दीवानी मामले की धीमी गति पर जताई हैरानी।

  2. अदालत ने कहा, सुनवाई की रफ्तार पर घोंघा भी सवाल उठा सकता है।

  3. 2015 के मुकदमे में 2026 तक सबूत पेश होने की प्रक्रिया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक दीवानी मामले पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को मुकदमे की धीमी गति पर हैरानी जताई। कहा कि सुनवाई जिस रफ्तार से चल रही है, उस पर तो घोंघा भी सवाल उठा सकता है। स्थिति यह है कि 2015 में दायर मुकदमे में वादी द्वारा सुबूत पेश करने की प्रक्रिया 2026 तक जारी है।

जस्टिस संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने गौर किया कि मई 2015 में शुरू हुए इस मुकदमे को जनवरी 2018 में 'वाणिज्यिक अदालतों के अधिनियम, 2015' के तहत वाणिज्यिक मुकदमे के तौर पर नया नंबर दिया गया और रजिस्टर किया गया।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की अपील

पीठ ने एक निजी फर्म द्वारा दायर अपील पर अपना फैसला सुनाया, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के फरवरी 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी।

हाई कोर्ट में चल रहे मुकदमे में फर्म ने अतिरिक्त दस्तावेज को रिकॉर्ड पर लाने और लंबित मुकदमे में गवाह को पूछताछ के लिए दोबारा बुलाने की अर्जी दी थी। इस अर्जी को हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया था। हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील को सुप्रीम कोर्ट ने भी खारिज कर दिया।

शीर्ष अदालत ने फर्म की उन दलीलों को मानने से इनकार कर दिया, जिनमें कहा गया था कि पेश किए जाने वाले दस्तावेज की प्रासंगिकता पर विचार किया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि जिस दस्तावेज को पेश करने की मांग की गई थी, वे फर्म के पास ही थे।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

यह भी पढ़ें- एशियाई खेलों की घुड़सवारी टीम चयन मामले की सुनवाई से हटे सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश