नई दिल्ली (जेएनएन)। सुप्रीम कोर्ट ने आज जेपी इंफ्राटेक और जेपी एसोसिएट लिमिटेड के घर खरीददारों के लंबित मामलों को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यू नल (NCLT) इलाहाबाद को भेज दिया है। साथ ही जेपी इंफ्रांटेक और जेपी एसोसिएट की ओर से जमा कराए गए 750 करोड़ रुपए और उसके ब्याज को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) को ट्रांसफर कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूर्ण ने मामले के निपटारे के लिए क्रेडिटर्स की नई समि‍ति गठित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि आगे की सारी कार्यवाही इनसाल्वेंसी एडं बैंक करप्टी कोड (आईबीसी) के अंतर्गत होंगी, जिसके तहत घर खरीदारों को क्रेडिटर्स की समिति में शामिल किया जाएगा।

मामले की अगली सुनवाई अब एनसीएलटी में होगी। एनसीएलटी को नीलामी प्रक्रिया को आज से 180 दिनों में पूरी करानी होगी। कोर्ट ने आदेश जारी किया कि जेपी इंफ्राटेक लिमिटेड और जेपी एसोसिएट्स लिमिटेड आगे से इनसॉल्वेंसी रिज्यूल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) की ओर से आयोजित की किसी भी नीलामी प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाएंगी।

बता दें कि जेपी इंफ्रा के 21 हज़ार फ्लैट खरीदारों ने कंपनी की दिवालिया प्रक्रिया के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था, जहां सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर 2017 को घर खरीददार चित्रा शर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए जेपी के दिवालिया प्रक्रिया को रोक दिया था। फ्लैट खरीदार अपने हितों की रक्षा चाहते थे। जेपी ग्रुप की मुख्य कंपनी जेपी एसोसिएट्स ने प्रस्ताव दिया है कि वो इन प्रोजेक्ट को पूरा करेगा। उसने मांग की है कि इलाहाबाद NCLT में जेपी इंफ्रा को लेकर लंबित कार्रवाई को चलने दिया जाए। इससे निवेशकों के हितों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।

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