नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड (केबीएल) द्वारा एक अपील में अतुल चंद्रकांत किर्लोस्कर और 13 अन्य लोगों से संपत्ति से संबंधित पारिवारिक विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता के मुद्दे पर अपनी राय देने को कहा है। केबीएल ने बांबे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें संपत्ति मामले में मध्यस्थता का निर्देश दिया गया था। शीर्ष अदालत ने 27 जुलाई को मामले में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था और इसमें शामिल पक्षों से मध्यस्थता की संभावना तलाशने को कहा था। संजय किर्लोस्कर केबीएल के चेयरमैन व एमडी हैं।

मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना, न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ ने मध्यस्थता के मुद्दे पर किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड की ओर से पेश अभिषेक मनु सिंघवी और श्याम दीवान सहित वरिष्ठ अधिवक्ताओं की दलीलों पर गौर किया। पीठ ने अतुल चंद्रकांत किर्लोस्कर तथा अन्य के वकील से इस मामले पर अपने विचार रखने को कहा। पीठ को बताया गया कि कुछ पक्ष सुप्रीम कोर्ट पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा द्वारा मध्यस्थता के लिए सहमत हैं और ग्रुप की जो कंपनियां अदालती कार्यवाही में पक्षकार नहीं हैं, उन्हें भी मध्यस्थता का हिस्सा होना चाहिए।

सुनवाई की शुरुआत में सिंघवी ने कहा कि यदि सभी कंपनियां और व्यक्ति परिणाम को लेकर जवाबदेह नहीं हैं तो मध्यस्थता एक निरर्थक कवायद होगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे में उसे कुछ अंतरिम आदेश पारित करने पड़ सकते हैं क्योंकि 'निष्पक्षता' होनी चाहिए और किसी भी पक्ष को अनुचित लाभ नहीं उठाना चाहिए। दलीलों को दर्ज करते हुए पीठ ने वकील से मध्यस्थता पर निर्देश लेने को कहा।

पीठ 12 नवंबर को संपत्ति मामले में मध्यस्थता का निर्देश देने वाले बांबे हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ किर्लोस्कर ब्रदर्स लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गई थी। इससे पहले शीर्ष अदालत ने किर्लोस्कर बंधुओं संजय और अतुल को संपत्ति से जुड़े पारिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता की संभावना तलाशने को कहा था।

Edited By: Monika Minal