नई दिल्ली, एजेंसियां। बंगाल में 2021 में चुनाव बाद हुई हिंसा की अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआइटी) से जांच कराने के अनुरोध वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र और बंगाल सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का वक्त दिया। जस्टिस दिनेश महेश्वरी और जस्टिस कृष्ण मुरारी की पीठ ने पक्षकारों से लिखित में अपना जवाब देने को कहा, जिससे याचिकाकर्ता उस पर जवाब दे सकें। शीर्ष अदालत उत्तर प्रदेश की रहने वाली वकील रंजना अग्निहोत्री और सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र सिंह द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिका में चुनाव बाद हुई हिंसा के कारण कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति के मद्देनजर केंद्र को बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद ग्रोवर ने याचिकाकर्ता के मकसद पर सवाल उठाया और पूछा कि उत्तर प्रदेश के एक व्यक्ति का इस मामले से क्या संबंध है। उन्होंने बताया कि कलकत्ता हाई कोर्ट राज्य के निवासियों द्वारा दायर ऐसी ही याचिकाओं पर पहले से विचार कर रहा है।

ग्रोवर ने कहा, 'समान जनहित याचिकाओं में हाई कोर्ट द्वारा सभी मुद्दों का ध्यान रखा गया है। मुझे याचिकाकर्ता के अधिकार क्षेत्र पर गंभीर आपत्ति है। बंगाल के लोगों ने इन मुद्दों को उठाया है और हाई कोर्ट ने कई आदेश भी दिए हैं। 'केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि याचिकाकर्ता की शिकायत के केवल कुछ हिस्से पर हाई कोर्ट ने ध्यान दिया है। शीर्ष अदालत ने उनसे अपनी सभी आपत्तियों को एक हलफनामे में देने को कहा और कहा कि वह मामले पर सितंबर के अंतिम हफ्ते में सुनवाई करेगी।

याचिका में केंद्र को राज्य में सामान्य स्थिति बहाली और उसे आंतरिक अशांति से बचाने के लिए प्रशासनिक अधिकारियों की सहायता के लिए सशस्त्र/अर्धसैनिक बलों को तैनात करने का निर्देश देने की भी मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि जनहित याचिका असाधारण परिस्थितियों में दायर की गई है क्योंकि विधानसभा चुनावों के दौरान विपक्षी दल भाजपा का समर्थन करने के कारण बंगाल के हजारों निवासियों को तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा आतंकित, दंडित और प्रताडि़त किया जा रहा है।

Edited By: Shashank Shekhar Mishra