ट्रांसजेंडर अधिकार कानून: सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों पर केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर अधिकार कानून के तहत महिलाओं के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों पर संभावित प्रभाव को लेकर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से ट्रांसजेंडर अधिकार कानून पर जवाब मांगा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को ट्रांसजेंडर अधिकार कानून के तहत महिलाओं के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों पर संभावित प्रभाव को लेकर दायर जनहित याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, कानून एवं न्याय तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालयों को नोटिस जारी किए।
महिला संगठन ‘विमेन्स डिक्लेरेशन इंटरनेशनल इंडिया’ ने याचिका में स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण, महिला जेलों में ट्रांसजेंडर व्यक्तियों की व्यवस्था, महिला खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी और गिरफ्तारी एवं तलाशी के दौरान महिलाओं को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा से जुड़े सवाल उठाए हैं।
याचिका को ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन अधिनियम, 2026 के प्रविधानों को चुनौती देने वाली लंबित याचिकाओं के साथ संबद्ध किया गया है।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अखिल सिब्बल ने कहा कि याचिका ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों का विरोध नहीं करती, बल्कि जैविक महिलाओं के लिए आरक्षित लाभों की सुरक्षा से संबंधित है। सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र लंबित मामलों में अपना पक्ष रखेगा और वर्तमान याचिका में उठाए गए मुद्दों पर भी जवाब देगा।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
