'सीजेपी ने सीजेआई की टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया', PIL पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और CBI से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई की 'कॉकरोच' टिप्पणी के व्यावसायिक दुरुपयोग और हेरफेर के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर केंद्र और सीबीआई से जवाब मांगा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और सीबीआई से मांगा जवाब। (फाइल फोठो।)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने सीजेआई टिप्पणी दुरुपयोग पर जवाब मांगा।
याचिकाकर्ता ने वर्चुअल कार्यवाही के हेरफेर पर कार्रवाई चाही।
कॉकरोच जनता पार्टी ने टिप्पणी का व्यावसायिक लाभ उठाया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की उपज हुई। इसी पार्टी ने हाल ही में नीट पेपर लीक के खिलाफ जेन जी विरोध प्रदर्शन किया था। अब तीन महीने बाद मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सरकार और सीबीआई से जवाब मांगा है।
यह पीआईएल उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करती है जिन्होंने वर्चुअल कोर्ट की कार्यवाही की चालाकी से एडिटिंग करके उस टिप्पणी का कमर्शियल फायदा उठाया और उसे ऐसा मतलब दिया जो कभी था ही नहीं।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में क्या कहा?
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की बेंच के सामने इस मुद्दे पर आधे घंटे तक चली बहस के दौरान याचिकाकर्ता और वकील राजा चौधरी ने कहा कि इस बात की गहरी जांच होनी चाहिए कि 15 मई को न्यायिक कार्यवाही के दौरान बिल्कुल अलग संदर्भ में इस्तेमाल किए गए कॉकरोच शब्द को कैसे चुना गया, चालाकी से एडिट किया गया और न्यायिक गरिमा को कम करने और संस्था की अखंडता को नुकसान पहुंचाने के लिए कमर्शियल तौर पर इस्तेमाल किया गया।
याचिकाकर्ता ने अधिकारियों से मांग की कि वे उन लोगों या संस्थाओं के खिलाफ कानून के अनुसार जांच करें और कार्रवाई करें जो कोर्ट में कही गई बातों या उदाहरणों (जिनमें सीजेपी की गतिविधियां भी शामिल हैं) का कमर्शियल फायदा उठाने, ट्रेडमार्क हड़पने, पैसे कमाने के लिए फैलाने या बिना इजाजत कमर्शियल इस्तेमाल करने में शामिल हैं।
साथ ही यह भी माना जाए कि संवैधानिक दायरे में निष्पक्ष आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य और अभिव्यक्ति की आजादी की इजाजत है, बशर्ते इससे संस्था की गरिमा को ठेस न पहुंचे।
'सीजेआई की टिप्पणी का गलत संदर्भ निकाला गया'
संजय दुबे बनाम दिल्ली हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल मामले में सीजेआई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने 15 मई को हुई सुनवाई का जिक्र करते हुए चौधरी ने जोर दिया कि मुख्य न्यायाधीश ने कॉकरोच वाली बात फर्जी वकीलों के संदर्भ में कही थी। उन्होंने कोर्ट की प्रक्रिया के गलत इस्तेमाल, पेशेवर मानकों में गिरावट और इससे संस्थान पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंता जताई थी।
'इन कोशिशों को रोकने वाला सिस्टम ही नहीं है'
उन्होंने कहा कि 15 मई के बाद से चुनिंदा तरीके से एडिट किए गए अदालती कार्यवाही के क्लिप्स में भारी बढ़ोतरी हुई है। चौधरी ने कहा कि अदालती कार्यवाही के दौरान की गई बातों और टिप्पणियों को तोड़-मरोड़कर मीम्स बनाए जाते हैं और मुनाफे के लिए सोशल मीडिया पर फैलाया जाता है।
उन्होंने शिकायत की कि संस्थान और जजों को बुरी छवि में दिखाकर जनता का भरोसा कम करने की इन बुरी कोशिशों के खिलाफ कोई सिस्टम नहीं है।
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