नई दिल्ली (प्रेट्र)। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सोशल मीडिया मंचों पर आधार से संबंधित गतिविधियों की निगरानी के लिए यूआइडीएआइ द्वारा सोशल मीडिया एजेंसी की सेवा लेने का प्रस्ताव खुद इसके पिछले प्रस्ताव के खिलाफ है। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा, एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल से इस मामले की सुनवाई में मदद करने का अनुरोध किया। सुप्रीम कोर्ट तृणमूल कांग्रेस के विधायक मोहुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई कर रहा है। विधायक ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया निगरानी एजेंसी की सेवा लेने का कदम सोशल मीडिया मंचों पर निगरानी रखने पर केंद्रित है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि यूआइडीएआइ जो प्रस्तावित कर रहा है, वह उसके द्वारा आधार की वैधता के संबंध में दी गई दलील के विरुद्ध है। यूआइडीएआइ ने आधार योजना की वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान कहा था कि वह आधार कार्ड धारक नागरिकों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर नहीं रखना चाहता।

मोइत्रा ने याचिका में कहा कि यूआइडीएआइ के निविदा पत्र के अनुसार, सोशल मीडिया एजेंसी की सेवा मांग रहा है। यह एजेंसी फेसबुक और ट्विटर जैसे मंचों पर आधार से संबंधित गतिविधियों पर नजर रखने के लिए 'ऑनलाइन रेपुटेशन मैनेजमेंट' और 'सोशल लिसनिंग' टूल लागू करेगी।

Posted By: Nancy Bajpai