नई दिल्ली, पीटीआइ। किसी व्यक्ति की सुरक्षात्मक उपायों के तहत (एहतियातन) गिरफ्तारी तभी की जाए जब उसकी वजह से कानून व्यवस्था बिगड़ रही हो या बिगड़ने की आशंका हो। यह बात सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार के एक व्यक्ति की गिरफ्तारी के आदेश को खारिज करते हुए कही है। तेलंगाना सरकार ने पिछले दिनों एक ऐसे व्यक्ति की सुरक्षात्मक उपायों के तहत गिरफ्तारी का आदेश दिया था जिस पर धोखाधड़ी और जालसाजी के कई आपराधिक मामले चल रहे हैं।

उसकी गिरफ्तारी के लिए जारी आदेश में लिखा था कि उसकी वजह से कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका है। उसकी वजह से समाज पर व्यापक दुष्प्रभाव पड़ने का खतरा है। अपने खिलाफ दर्ज पांच एफआइआर में अग्रिम जमानत और जमानत लेने में सफल रहने के बाद उसकी गिरफ्तारी के लिए प्रदेश सरकार ने तेलंगाना प्रिवेंशन आफ डेंजरस एक्टिविटीज एक्ट (टीपीडीएए) के तहत गिरफ्तारी का आदेश जारी किया था।

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस बीआर गवई की पीठ ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश को खारिज करने हुए राज्य सरकार के गिरफ्तारी आदेश को रद किया। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के आदेश को बरकरार रखा था। जिस व्यक्ति के खिलाफ गिरफ्तारी आदेश जारी हुआ था उसकी पत्नी सुप्रीम कोर्ट में आई थी।

पीठ ने अपने आदेश में कहा, टीपीडीएए के तहत गिरफ्तारी के लिए जो स्थितियां बताई गई हैं उनके अनुसार उसी व्यक्ति की एहतियातन गिरफ्तारी के लिए आदेश दिया जा सकता है जिसके कारण समाज को नुकसान या खतरा या असुरक्षा पैदा होने का अंदेशा हो जिसकी मौजूदगी से जनजीवन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका हो। लेकिन जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी का आदेश दिया गया था उसके खिलाफ धोखाधड़ी, घोटाले और विश्वास तोड़ने वाले (अमानत में खयानत) मामले दर्ज हैं। उनमें वह जमानत पाने में सफल रहा है। शीर्ष न्यायालय ने नहीं माना कि उस व्यक्ति के चलते समाज को कोई गंभीर खतरा पैदा होने की आशंका है।