नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि उन राज्यों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है, जहां पोक्सो एक्ट तहत दर्ज होने वाले बच्चों के यौन शोषण के मामलों के निस्तारण की दर बेहद कम है।

समस्या से निपटने के लिए उचित उपायों का सुझाव दें

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस बीआर गवई और सूर्यकांत की खंडपीठ ने कुछ याचिकाओं पर सुनवाई की जो महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध से संबंधित थे। खंडपीठ ने अटर्नी जनरल केके वेणुगोपाल और अन्य वकीलों से पूछा कि वह इस समस्या से प्रभावशाली तरीके से निपटने के लिए उचित उपायों का सुझाव दें।

खंडपीठ ने कहा कि सामान्य आदेश से समस्या का हल नहीं निकलेगा। इसलिए हम चाहते हैं कि सिद्धार्थ लूथरा (वरिष्ठ वकील जो बतौर न्यायिक मित्र खंडपीठ की सहायता कर रहे हैं) उन राज्यों की सूची बनाएं जहां ऐसे मामले सबसे अधिक होते हैं। फिर हम उन राज्यों पर अधिक ध्यान देंगें, जहां अधिक संख्या में ऐसे मामलों की सुनवाई लंबित है।

अब विशेष खंडपीठ चार हफ्ते बाद करेगी सुनवाई 

हालांकि खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान बताया कि जस्टिस दीपक गुप्ता की एक अन्य पीठ ऐसे मामलों की बड़ी गहराई से सुनवाई कर रही है। और इस समस्या से निपटने के लिए कई दिशा-निर्देश भी जारी किए हैं। उन्होंने कहा कि इसलिए अब ऐसे सभी मामलों की सुनवाई विशेष खंडपीठ चार हफ्ते बाद करेगी। इस खंडपीठ में जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस होंगे। उन्होंने वकीलों से कहा कि वह अपनी जिरह विशेष बेंच के आगे ही जारी रखें। इस संक्षिप्त सुनवाई में खंडपीठ ने सुझाव दिया कि 'बचपन बचाओ आंदोलन' जैसे संगठनों को इसमें शामिल किया जाना चाहिए। ताकि यौन उत्पीड़न के शिकार बच्चों की मदद की जा सके।

 

Posted By: Arun Kumar Singh

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