नई दिल्‍ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कोरोना महामारी से निबटने में कथित कुप्रबंधन की स्वतंत्र जांच की मांग के लिए पूर्व नौकरशाहों की ओर से दाखिल जनहित याचिका को खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान पूर्व नौकरशाहों की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने पैरवी की। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रशांत भूषण ने कहा कि चार फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से एक एडवाइजरी जारी की गई थी। फि‍र भी चार मार्च तक विदेशों से आने वाले यात्रियों की जांच नहीं की गई।

प्रशांत भूषण ने आगे कहा कि 24 फरवरी को नमस्ते ट्रंप कार्यक्रम के आयोजन को मंजूरी दी गई। विशेषज्ञों का मानना था कि संपूर्ण लॉकडाउन नहीं लगाया जाना चाहिए। लॉकडाउन के कारण जीडीपी में 23 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और अर्थव्‍यवस्‍था को चोट पहुंची। भूषण ने अपनी दलील में आरोप लगाया कि सरकार कोरोना संकट पर काबू पाने में विफल रही है। संक्रमण से 63 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हो चुके हैं।

प्रशांत भूषण ने कहा कि पर्याप्‍त संख्या में पीपीई किट के लिए कथि‍त तौर पर कदम नहीं उठाए गए जिससे अनेक डॉक्टरों की जान चली गई। भूषण की दलील पर अदालत ने कहा कि यह सार्वजनिक बहस का मामला है। न्यायालय इसमें दखल नहीं देना चाहता है। ये मामले सरकार के लिए हैं ओर प्राधिकारियों को स्थिति से निबटने के लिए पर्याप्‍त आजादी दी जानी चाहिए।

बता दें कि पूर्व नौकरशाहों के एक समूह की ओर से दाखिल इस जनहित याचिका में जांच आयोग कानून के तहत आयोग गठित करके कोरोना से निबटने में हुई खामियों का पता लगाने की गुजारिश की गई थी। इस बीच केंद्रीय स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को बीते 24 घंटे में देश में कोरोना के 86,821 नए मामले सामने आए जिसके साथ संक्रमितों का आंकड़ा 63 लाख से अधिक हो गया है। बीते 24 घंटे में 85,376 लोगों ने बीमारी को शिकस्‍त भी दी है जिसके साथ ही 52,73,201 लोग महामारी से उबर चुके हैं।  

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