नई दिल्‍ली (एएनआई)। सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को रेप या यौन उत्‍पीड़न जैसे अपराध को जेंडर मुक्‍त करने संबंधित याचिका को खारिज कर दिया गया। याचिका में कहा गया है कि यौन अपराध को जेंडर के आधार पर तय नहीं किया जाना चाहिए। यह पुरुषों के मूल अधिकारों का हनन है।

वकील ऋषि मल्होत्रा ने अपनी याचिका में मांग की थी कि महिलाओं को भी पुरुषों की तरह रेप और यौन उत्पीड़न जैसे मामलों में दंडित किया जाए, पुरूष भी रेप के पीड़ित हो सकते हैं।

पुरुष यदि 'रेप' संबंधित शिकायत करता है तो आरोपी को धारा 377 के तहत सजा दी जाती है। पुरुष से जुड़े ऐसे अपराध को 'रेप' नहीं अप्राकृतिक सेक्स की कैटेगरी में रखा जाता है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश का हवाला दिया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने रेप से जुड़े कानून पर फिर से विचार करने की सहमति‍ जताई है। याचिका में कहा गया है कि अगर कोई पुरुष किसी महिला के खिलाफ रेप या यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कराता है तो महिला के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती क्योंकि 158 साल पुराने IPC के मुताबिक केवल पुरुष ही ऐसे अपराध करते हैं।

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Posted By: Monika Minal