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'नहीं दे सकते इसके निर्देश', एआईएफ व एफपीआई के अंतिम लाभार्थियों का ब्योरा उजागर कराने की मांग सुप्रीम कोर्ट से खारिज

Published: Thu, 29 Oct 2026 07:45 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड्स (एआइएफ) और फारेन पोर्टफोलियो इंवेस्टर्स (एफपीआई) के अंतिम लाभकारी मालिकों का ब्योरा सार्वजनिक करने ...और पढ़ें

एआईएफ और एफपीआई के अंतिम लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग ठुकराई

 एआईएफ और एफपीआई के अंतिम लाभार्थियों की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग ठुकराई

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) को अल्टरनेटिव इंवेस्टमेंट फंड्स (एआइएफ), फारेन पोर्टफोलियो इंवेस्टर्स (एफपीआई) और भारत में उनकी इंटरमीडियरीज के अंतिम लाभकारी मालिकों व पोर्टफोलियो का ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्देश देने से इनकार कर दिया।

जस्टिस बीवी नागरत्ना, जस्टिस आर. महादेवन और जस्टिस डीके उपाध्याय की पीठ ने कहा, 'हमारा मानना है कि संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत अधिकार क्षेत्र का इस्तेमाल करते हुए ऐसी मांग मंजूर नहीं की जा सकती, क्योंकि याचिकाकर्ता ने जिस पूर्ण ब्योरे को उजागर करने की मांग की है, उसके लिए मौजूदा कानूनी ढांचे या नियमों की जरूरत होगी। ऐसे कानूनी ढांचे या नियमों के अभाव में अदालत अंतिम लाभकारी मालिकों की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश नहीं दे सकती…। इसलिए रिट याचिका का निपटारा किया जाता है।'

पीठ संसद सदस्य महुआ मोइत्रा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। शुरुआत में पीठ ने मोइत्रा से ऐसी याचिका दायर करने पर सवाल किया और कहा कि वह यह मुद्दा संसद में उठा सकती हैं और चर्चा की मांग कर सकती हैं। उनके वकील प्रशांत भूषण ने दलील दी कि इन दिनों संसद में चर्चा कराना बहुत मुश्किल है और वह इस संबंध में हलफनामा दाखिल कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, 'हम निर्दोष निवेशकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ा बहुत अहम मुद्दा उठा रहे हैं। हमारे शेयर बाजारों में 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है।' इस पर पीठ ने कहा कि अदालत के सामने ऐसा कोई निवेशक नहीं है जो वास्तव में प्रभावित हुआ हो।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि याचिकाकर्ता का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश में विदेशी निवेश न आए। भूषण ने इसका खंडन करते हुए कहा कि अंतिम लाभकारी मालिकों का ब्योरा उजागर करने से वैध निवेश को कोई नुकसान नहीं होगा।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)