रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक के पूर्व प्रबंधन की बढ़ी मुश्किलें, सुप्रीम कोर्ट ने संदिग्ध लेन-देन पर उठाए सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के पूर्व प्रबंधन के संदिग्ध लेन-देन पर कड़ी फटकार लगाई और पूछा कि उन्हें रद्द क्यों ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के संदिग्ध लेन-देन पर जताई आपत्ति।
फर्जी स्टाम्प पेपर से संपत्ति ट्रांसफर का मामला उजागर हुआ।
अधूरे प्रोजेक्ट्स और ट्विन टावर रिफंड में फंड की कमी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिवालिया हो चुकी रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक के पूर्व प्रबंधन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही है। कारण है कि इस सिलसिले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए कंपनी के संदिग्ध लेन-देन को रद्द करने की बात पर जोर दिया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूछा है कि कंपनी की संपत्तियों को ट्रांसफर करने के लिए किए गए उनके संदिग्ध लेन-देन को रद्द क्यों न घोषित कर दिया जाए। बता दें कि सुपरटेक की अधूरी पड़ी 30 में से 16 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का काम सरकारी कंपनी NBCC कर रही है।
फर्जी स्टाम्प पेपर से संपत्ति ट्रांसफर करने का मामला
मामले में अदालत की मदद कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव जैन ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ को एक गंभीर बात बताई। वकील ने फर्जी दस्तावेजा का दावा करते हुए बताया कि जब अर्न्स्ट एंड यंग ने खातों का फोरेंसिक ऑडिट शुरू किया, तो पता चला कि सुपरटेक के पूर्व प्रबंधन ने फर्जी स्टाम्प पेपर के जरिए संपत्तियों को बेचने या ट्रांसफर करने की कोशिश की है।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि 'सुपरटेक सुपरनोवा' प्रोजेक्ट से जुड़े कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां फर्जी पंजीकृत स्टाम्प पेपर का इस्तेमाल करके बड़ी संख्या में फ्लैट्स का ट्रांसफर किया गया।
वकील ने कोर्ट से की सख्त रोक की मांग
इतना ही नहीं वकील ने कोर्ट से सिफारिश की कि कंपनी के पूर्व निदेशकों और अधिकारियों को ऐसे गैर-कानूनी काम करने से तुरंत रोका जाए और अतीत में किए गए सभी अवैध लेन-देन को रद्द घोषित किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने इस सुझाव से सहमति जताते हुए कहा कि वह इस पर अंतरिम आदेश देने के पक्ष में है। कोर्ट ने पूर्व प्रबंधन को एमिकस क्यूरी की रिपोर्ट पर 1 हफ्ते के भीतर अपनी आपत्ति दर्ज कराने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त को होगी।
फंड की कमी बनी सबसे बड़ी रुकावट
इसके अलावा सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि पूर्व जस्टिस कृष्णा मुरारी की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट समिति की देखरेख में NBCC द्वारा जो 16 प्रोजेक्ट्स पूरे किए जा रहे हैं, वे पैसों की भारी कमी से जूझ रहे हैं।
बैंकों से लोन मिलने में दिक्कत
सुपरटेक द्वारा बैंक लोन न चुकाने के कारण उसके खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) हो चुके हैं। इस वजह से आरबीआई के नियमों के तहत कोई भी सरकारी बैंक इन प्रोजेक्ट्स के लिए नया लोन देने को तैयार नहीं है और निजी वित्तीय संस्थानों से मिलने वाला लोन बहुत ऊंचे ब्याज दरों पर मिल रहा है।
एमिकस क्यूरी का विशेष छूट पर जोर
एमिकस क्यूरी ने सुझाव दिया कि यदि सुप्रीम कोर्ट आरबीआई और सरकारी बैंकों को NBCC द्वारा चलाए जा रहे इन प्रोजेक्ट्स के लिए नियमों में थोड़ी ढील देने का निर्देश दे, तो काम तेज हो जाएगा और घर खरीदारों को जल्द फ्लैट मिल सकेंगे।
इस सुझाव पर सुप्रीम कोर्ट ने RBI और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की अगुवाई वाले बैंकों के समूह को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। वहीं, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने शिकायत की कि जमीन उनकी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट समिति के कामकाज में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
ट्विन टावर के खरीदारों के रिफंड पर अपडेट
गौरतलब है कि सुपरटेक के गिराए जा चुके अवैध 'ट्विन टावर्स' के कुछ खरीदारों ने शिकायत की कि उन्हें अभी तक उनके पैसों का रिफंड नहीं मिला है। इस पर एमिकस क्यूरी ने बताया कि खरीदारों का लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये का बकाया है। जैसे ही सुप्रीम कोर्ट की समिति विभिन्न माध्यमों से फंड जुटा लेती है, अगले 3 महीनों के भीतर इस बकाये का भुगतान कर दिया जाएगा।
