क्या शिवसेना के दोनों गुटों को चुनाव चिह्न न देने पर विचार किया गया था? सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से किया सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि क्या उसने शिवसेना के एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुटों को 'धनुष-बाण' चुनाव चिह्न न देने पर विचार किया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से शिवसेना चुनाव चिह्न पर सवाल किया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को पूछा कि क्या निर्वाचन आयोग ने शिवसेना के एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को पार्टी का आरक्षित ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न न देने और अलग-अलग चिह्न पर चुनाव लड़ने के लिए कहने की संभावना पर विचार किया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने उन याचिकाओं पर सुनवाई की, जिनमें शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने और उसे ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिह्न आवंटित करने के चुनाव आयोग (ईसी) के फैसले को चुनौती दी गई है।
शिंदे गुट के वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा कि चुनाव आयोग का विधायी बहुमत परीक्षण कानूनी रूप से वैध था और विवाद की परिस्थितियों के हिसाब से उचित था।
न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि जब यह तय किया जा रहा था कि शिवसेना पार्टी और उसका चुनाव चिह्न किसका है, उस समय शिंदे गुट के विधायकों के खिलाफ पद से अयोग्यता की कार्यवाही लंबित थी।
कौल ने 2019 के विधानसभा चुनाव में शिंदे गुट के 40 विधायकों को मिले 76 प्रतिशत वोट का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उद्धव का समर्थन करने वाले 15 विधायकों को केवल 23.5 प्रतिशत मत मिले थे।
कौल ने लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का भी हवाला दिया, जिसमें शिंदे का समर्थन करने वाले 13 सांसदों को 73 प्रतिशत वोट मिले।उन्होंने कहा कि विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की लंबित कार्यवाही निर्वाचन आयोग को विवाद का निपटारा करने से नहीं रोक सकती।
मामले की अगली सुनवाई 22 सितंबर को होगी। उद्धव खेमे ने शिंदे गुट को शिवसेना के नाम और चुनाव चिह्न का अवैध उपयोग करने का आरोप लगाया है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
