नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट से पत्रकार राणा अय्यूब को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने धन शोधन के एक मामले में गाजियाबाद की विशेष अदालत द्वारा समन को चुनौती देने वाली राणा अय्यूब की याचिका को खारिज कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

जस्टिस वी रामासुब्रमण्यम और जे बी पारदीवाला की पीठ ने अय्यूब को निचली अदालत के समक्ष अधिकार क्षेत्र का मुद्दा उठाने की अनुमति दी और कहा कि यह सबूत का सवाल है। पीठ की ओर से फैसला सुनाने वाले न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमण्यन ने धन शोधन रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) की धारा-3 का हवाला दिया और कहा कि नवी मुंबई वह जगह है, जहां अपराध की आय पहुंचती है।

पीठ ने सुनवाई के दौरान क्या कहा

उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या कोई एक या अधिक गतिविधियां (पीएमएलए की धारा 3 के तहत) हुई हैं और तथ्य और स्थान का सवाल सबूतों के आधार पर तय किया जाना है। इसलिए, हम ट्रायल कोर्ट के समक्ष इस मुद्दे को उठाने के लिए खुला छोड़ देते हैं। हम इस याचिका को खारिज कर रहे हैं।

राणा अय्यूब के वकील ने कोर्ट में दी दलील

मामले की सुनवाई के दौरान राणा अय्यूब की ओर से पेश अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने कहा कि क्या उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कानून द्वारा अधिकृत प्रक्रिया से वंचित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद की विशेष अदालत के पास अपराध की कोशिश करने का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है, जबकि ये कहा गया है कि कथित अपराध नवी मुंबई में किया गया था। ग्रोवर ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने नवी मुंबई के एक बैंक में पत्रकार के निजी बैंक खाते को कुर्क कर लिया है, जिसमें करीब एक करोड़ रुपये थे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता बोले

वहीं, ईडी की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि उत्तर प्रदेश में कार्रवाई के कारण के रूप में जांच एजेंसी ने गाजियाबाद की अदालत में अभियोजन की शिकायत दर्ज की थी, जहां गाजियाबाद सहित कई लोगों ने उनके क्राउडफंडिंग अभियान में योगदान दिया था। उन्होंने कहा था कि धन शोधन का अपराध एक स्वतंत्र अपराध नहीं है और हमेशा एक निर्धारित अपराध से जुड़ा हुआ है, जिसके लिए गाजियाबाद के इंदिरापुरम पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी को सुरक्षित रखा था फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 31 जनवरी को अय्यूब की याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। अय्यूब ने अपनी याचिका में अधिकार क्षेत्र की कमी का हवाला देते हुए ईडी द्वारा गाजियाबाद में शुरू की गई कार्यवाही को रद्द करने की मांग की थी, क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग का कथित अपराध मुंबई में हुआ था।

क्या है मामला

ईडी ने दावा किया था कि अय्यूब ने इन पैसों का इस्तेमाल अपने लिए 50 लाख रुपये की सावधि जमा बनाने के लिए किया और 50 लाख रुपये एक नए बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिए। जांच में पाया गया कि राहत कार्य के लिए केवल 29 लाख रुपये का इस्तेमाल किया गया था।

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Edited By: Mohd Faisal