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'वैवाहिक विवाद में POCSO आरोप पर तुरंत गिरफ्तारी न हो', सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

Published: Fri, 25 Sep 2026 12:05 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में बच्चों के यौन उत्पीड़न के आरोपों पर महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं।

वैवाहिक विवाद के दौरान पोक्सो आरोप पर तत्काल गिरफ्तारी से बचें: SC

वैवाहिक विवाद के दौरान पोक्सो आरोप पर तत्काल गिरफ्तारी से बचें: SC

HighLights

  1. वैवाहिक विवाद के दौरान पोक्सो आरोप पर तत्काल गिरफ्तारी से बचें

  2. गिरफ्तारी से पूर्व बच्चे का विशेषज्ञ द्वारा मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराना होगा

  3. यह निर्देश माता-पिता या साथ रहने वाले परिवार सदस्य पर लागू

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वैवाहिक विवाद के दौरान बच्चों के यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने कहा कि यदि पोक्सो (यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012) कानून के तहत आरोप बच्चे के माता-पिता या उसके साथ एक ही घर में रहने वाले परिवार के सदस्य पर लगाया गया है और माता-पिता के बीच वैवाहिक विवाद चल रहा है, तो आरोपित की तत्काल गिरफ्तारी नहीं की जानी चाहिए।

पोक्सो आरोप पर तत्काल गिरफ्तारी से बचें

पीठ ने कहा कि ऐसे मामलों में गिरफ्तारी से पहले बच्चे का विशेषज्ञ द्वारा मनोवैज्ञानिक या मनोरोग संबंधी परीक्षण कराया जाना जरूरी होगा।

पुलिस को शिकायत मिलने के समय यह भी पता करना होगा कि बच्चे के माता-पिता के बीच कोई वैवाहिक विवाद या ऐसा तनाव तो नहीं है, जिसका मामले पर असर पड़ सकता है।

कोर्ट ने कहा कि इसका मतलब यह नहीं है कि बच्चे की शिकायत को नजरअंदाज किया जाए। बच्चे की सुरक्षा, सम्मान और मानसिक स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता हैं।

लेकिन आरोप की पृष्ठभूमि और परिस्थितियों को समझे बिना की गई कार्रवाई बच्चे और उसके माता-पिता के रिश्ते को भी स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।

पीठ ने कहा कि झूठे आरोपों के कुछ मामलों में विवाद को बढ़ाने वाले लोगों की भूमिका भी सामने आती है। अदालत ने ऐसे मामलों में सलाह देने वालों की भूमिका पर भी चिंता जताई, जहां किसी भी कीमत पर मामला जीतने की कोशिश विवाद को और गंभीर बना देती है।

इन परिस्थितियों में लागू होगा निर्देश

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार तत्काल गिरफ्तारी से पहले सुरक्षा प्रक्रिया तब अपनाई जाएगी, जब दो परिस्थितियां साथ मौजूद हों। पहली, पोक्सो के तहत आरोप बच्चे के माता-पिता या उसके साथ रहने वाले परिवार के सदस्य पर हो।

दूसरी, बच्चे के माता-पिता के बीच वैवाहिक विवाद हो, चाहे वह अदालत में लंबित हो या नहीं। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में पुलिस अधिकारी को शिकायत दर्ज करते समय वैवाहिक विवाद की मौजूदगी की जानकारी हासिल करनी होगी।

इसके बाद बच्चे की मनोवैज्ञानिक स्थिति का विशेषज्ञ मूल्यांकन कराया जाएगा और गिरफ्तारी का फैसला परिस्थितियों के आधार पर किया जाएगा।

पीठ ने यह भी रेखांकित किया कि किसी आरोप से माता-पिता को होने वाली सामाजिक और व्यक्तिगत क्षति अलग है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि विवाद और जांच का असर बच्चे के मन पर लंबे समय तक रह सकता है। इसलिए पोक्सो की सुरक्षा व्यवस्था और निष्पक्ष जांच दोनों के बीच संतुलन जरूरी है।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)