यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 17, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सुरक्षा के मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों को एकबार फिर विदेश से 'सिख फार जस्टिस' की धमकी
पंजाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में चूक के मसले पर जांच कमेटी बनाने की मांग करने वाले सुप्रीम ...और पढ़ें

नई दिल्ली, एएनआइ। पंजाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में चूक के मसले पर जांच कमेटी बनाने की मांग करने वाले सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अधिवक्ताओं को विदेश से लगातार धमकियां दी जा रही हैं। समाचार एजेंसी एएनआइ के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के कई वकीलों को सोमवार को एकबार फिर से विभिन्न अंतरराष्ट्रीय नंबरों से फोन पर धमकी दिए जाने की शिकायत की। ये धमकियां कथित तौर पर सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की ओर से दी जा रही हैं जिसने इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी की सुरक्षा चूक के बारे में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को धमकियां दी थी।
सुप्रीम कोर्ट के वकील विष्णु शंकर जैन को सोमवार को फिर से धमकी भरे फोन आए। जैन ने कहा कि उन्हें शिकायत दर्ज करने को लेकर एसएफजे से धमकी भरे फोन आए हैं। उन्होंने पिछले हफ्ते इस संबंध में दिल्ली पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। फोन करने वालों ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों को एकबार फिर धमकियां दी है। सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) की ओर से कथित तौर पर पहले से रिकॉर्ड किए गए कॉल में सुप्रीम कोर्ट के वकीलों के खिलाफ अपनी धमकी को दोहराया गया है।
धमकी देने वालों की ओर से कहा गया है कि वे सुप्रीम कोर्ट को सेवानिवृत्त उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में जांच को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं देंगे। एडवोकेट विष्णु शंकर जैन के अलावा एडवोकेट अपूर्व शुक्ला और निशांत कटनेश्वरकर (Nishant Katneshwarkar) को भी पहले से रिकॉर्ड किए गए ऑडियो के जरिए अंतरराष्ट्रीय कॉल के माध्यम से धमकियां दी गई हैं।
इससे पहले भी पंजाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा में चूक के मसले पर जांच कमेटी बनाने की मांग करने वाले अधिवक्ताओं को विदेश से धमकियां मिल चुकी हैं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस संबंध में सिख फार जस्टिस के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। बीते दिनों सुप्रीम कोर्ट में प्रधानमंत्री की सुरक्षा मामले की पैरवी कर रहे अधिवक्ताओं ने सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति को इस संबंध में जानकारी दी थी। इस पर उन्होंने पुलिस में शिकायत करने को कहा था।
