नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के रूप में न्यायाधीश अगले हफ्ते से शीर्ष अदालत परिसर में वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई के लिए कोर्ट रूम में आ सकते हैं। कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए देश भर में लागू लॉकडाउन के कारण शीर्ष अदालत 25 मार्च से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनवाई कर रही है। उसने अधिवक्ताओं और अन्य कर्मचारियों के प्रवेश को उच्च सुरक्षा क्षेत्र में निलंबित कर दिया था।

न्यायाधीश एल नागेश्वर राव, एस अब्दुल नजीर और संजीव खन्ना की पीठ जब सुनवाई कर रही थी तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पूछा की कि क्या न्यायाधीश शीर्ष अदालत परिसर से सुनवाई कर रहे हैं, इस पर पीठ ने कहा, ‘हां, यह पायलट प्रोजेक्ट है।’ इसके बाद उन्होंने आगे जोड़ा कि अगले सप्ताह से न्यायाधीश वीडियो कांफ्रेंसिंग के लिए कोर्ट रूम में आ सकते हैं। कानून अधिकारी ने कहा, ‘यह अच्छा विचार है।’

लॉकडाउन के दौरान, पीठ आमतौर पर न्यायाधीशों के आवास पर एकत्र होती है और वकीलों को अपने घरों या कार्यालयों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये मामले की सुनवाई में शामिल होने की अनुमति होती है।

वर्चुअल सिस्टम से सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट अव्वल

सुप्रीम कोर्ट ने लॉकडाउन के दौरान अपने वर्चुअल कोर्ट सिस्टम को सही ठहराया है। अदालत का कहना है कि इस महामारी के दौर में न्याय की व्यवस्था को रोका नहीं जा सकता है। अदालत ने विभिन्न देशों के आंकड़ों के साथ यह बताया है कि वर्चुअल कोर्ट से सुनवाई के मामले में भारत का सुप्रीम कोर्ट अन्य देशों की अदालतों की तुलना में अव्वल है।

अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, इटली, जर्मनी, चीन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर और फ्रांस समेत करीब 23 देशों में वर्चुअल कोर्ट सिस्टम से सुनवाई हो रही है, लेकिन नतीजों के लिहाज से भारतीय न्यायपालिका का प्रदर्शन सबसे अच्छा है।सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि यह व्यवस्था सभी पक्षों के समय, धन और ऊर्जा की बचत के लिहाज से शानदार है।

Posted By: Shashank Pandey

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