नई दिल्ली, प्रेट्र। सुप्रीम कोर्ट ने असम में विधानसभा और संसदीय सीटों के परिसीमन के खिलाफ दायर एक याचिका पर केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया है। इस परिसीमन का यह कहते हुए विरोध किया गया है कि यह 2001 की पुरानी जनगणना पर प्रस्तावित है। ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआइयूडीएफ) ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर परिसीमन को कोविड-19 महामारी खत्म होने तक टालने की मांग की है।

इसने कहा है कि 2011 की जनगणना हो चुकी है, जबकि 2021 की जनगणना की प्रक्रिया चल रही है। जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया, जिसमें इस साल के 28 फरवरी के आदेश को रद करने की मांग की गई है। यह आदेश आठ फरवरी, 2008 की अधिसूचना को रद कर जारी किया गया था, जिसमें असम के लिए परिसीमन की प्रक्रिया को टाल दिया गया था।

जम्मू कश्मीर का परिसीमन हुआ था

केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर प्रदेश बनने के बाद यहां पहले विधानसभा चुनाव कराने से पूर्व 90 विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया था। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जम्मू-कश्मीर सहित अन्य केंद्र शासित राज्यों के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित परिसीमन आयोग में एसोसिएट सदस्यों को नामांकित किया था। जस्टिस (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई को सात मार्च को परिसीमन आयोग का अध्यक्ष बनाया गया था। भारत के चुनाव आयोग के आयुक्त सुशील चंद्र इसके सदस्य हैं। एसोशिएट सदस्यों में पीएमओ में मंत्री डॉ.जितेंद्र सिंह, श्रीनगर संसदीय क्षेत्र के सांसद व नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष डाॅ फारुक अब्दुल्ला भी शामिल हैं।

लोकसभा स्पीकर ने परिसीमन अधिनियम 2002 के अनुच्छेद-दो के तहत एसोसिएट सदस्यों को नामजद किया है। ये सदस्य केंद्र शासित जम्मू कश्मीर में पहली विधानसभा के गठन के लिए चुनावी मार्ग तैयार करने के लिए विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन की प्रक्रिया को पूरा करने में सहयोग करेंगे। लोकसभा स्पीकर ने केंद्र शासित जम्मू कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर और नागालैंड के लिए परिसीमन आयोग में एसोसिएट सदस्यों को नियुक्त किया है।

Posted By: Shashank Pandey

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