नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। छब्बीस सालों से जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे एजी पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर सजा निरस्त किये जाने की मांग की है। कोर्ट ने पेरारिवलन की याचिका पर सीबीआइ को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

राजीव गांधी की हत्या की साजिश में शामिल होने पर पेरारिवलन को अन्य अभियुक्तों के साथ फांसी की सजा हुई थी और सुप्रीम कोर्ट तक से मृत्युदंड पर मुहर लगी थी। लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के समक्ष दया याचिका 11 वर्ष तक लंबित रहने के आधार पर पेरारिवलन और दो अन्य हत्यारों की फांसी को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था।

बुधवार को पेरारिवलन के वकील गोपाल शंकरनारायण ने न्यायमूर्ति रंजन गोगोई व न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ के समक्ष कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का 1999 का फैसला वापस लेने की मांग अर्जी दाखिल की है इस अर्जी पर सीबीआई से जवाब मांगा जाए। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद सीबीआइ व सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट मामले पर 21 फरवरी को फिर सुनवाई करेगा।

अर्जी में कहा गया है कि उसे कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने के जुर्म में दोषी ठहराया है जबकि वह साजिश में शामिल नहीं था उसे नहीं मालूम था कि जो नौ वोल्ट की दो बैटरियां उसने खरीदीं थीं उनका उपयोग बम में किया जाएगा। अर्जी में सीबीआई के पूर्व एसपी वी. थंगराजन के हलफनामे को आधार बनाया है जिन्होंने टाडा कानून के तहत अभियुक्तों के अपराध स्वीकृति के बयान दर्ज किये थे। तत्कालीन एसपी के हलफनामे में कहा गया है कि पेरारिवलन ने अपने अपराध स्वीकृति के बयान में साफ तौर पर कहा है कि उसे बैटरी खरीदते समय ये नही मालूम था कि उसका किस उद्देश्य में उपयोग होगा।

मई 1999 को सुप्रीम कोर्ट ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रचने में चार दोषियों पेरारिवलन, सान्थन, मुरगुन और नलनी को फांसी की सजा सुनवाई थी। बाद में तमिलनाडु के राज्यपाल ने वर्ष 2000 में तमिलनाडु सरकार की संस्तुति पर और यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी की अपील पर नलनी की फांसी उम्रकैद मे तब्दील कर दी थी। 18 फरवरी 2014 को सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति के यहां दया याचिका 11 वषरें तक लंबित रहने के आधार पर पेरारिवलन व दो अन्य की फांसी उम्रकैद मे तब्दील कर दी थी।

गत बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से तमिलनाडु सरकार के राजीव गांधी के सातो हत्यारों को रिहा किये जाने के पत्र पर तीन महीने में फैसला लेने को कहा था।

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Posted By: Arti Yadav