नई दिल्ली, एएनआइ। सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकता संशोधन कानून, 2019 (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाने वाली एक याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है। देवबंदी विचारधारा के इस्लामी संगठन जमियत उलेमा-ए-हिंद ने यह याचिका दायर की है। सर्वोच्च अदालत ने इस याचिका के साथ ही संबंधित और मामलों को भी संलग्न कर दिया है। दरअसल सौ से अधिक याचिकाएं सीएए के विरोध और समर्थन में सुप्रीम कोर्ट में दायर हैं।

नागरिकता संशोधन कानून पर देश के कई हिस्सों में अब भी प्रदर्शन जारी है। इस कानून के जरिये इस्लामिक पड़ोसी देश अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश में धर्म के आधार पर प्रताडि़त अल्पसंख्यक हिंदुओं, सिख, ईसाई, बौद्धों, जैन और पारसियों को नागरिकता दी जाएगी। लेकिन भारत की नागरिकता के लिए केवल उन्हीं के आवेदन स्वीकार किए जाएंगे जो 31 दिसंबर, 2014 तक भारत में आ चुके हैं।

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने विगत सात फरवरी को असम समझौते को प्रभावी रूप से लागू करने और नागरिकता संशोधन कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था। मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्र से याचिका पर जवाब भी मांगा था।

असम सामाजिक न्याय मंच की ओर से दी गई याचिका में असम समझौते, 1985 को लागू करने के लिए प्रभावी कदम उठाने के दिशानिर्देश देने की मांग की गई थी और असम के मूल निवासियों की खास संस्कृति, विरासत और परंपराओं को सहेजने और बरकरार रखने की भी मांग की गई है। नागरिकता संशोधन कानून पर देश के कई हिस्सों में अब भी प्रदर्शन जारी है।

Posted By: Manish Pandey

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