नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ वकील का दर्जा देने के लिए स्वयं और देश के 24 हाईकोर्ट के लिए मानक तय कर दिये हैं। कोर्ट ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाते हुए 11 दिशा निर्देश जारी किये हैं। अब वरिष्ठता के दर्जे पर विचार के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में एक स्थाई समिति होगी जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश करेंगे। वरिष्ठता का दर्जा देने से पहले वकील की काबिलियत, अनुभव, व्यक्तित्व और अनुकूलता के आधार पर अंक दिये जाएंगे। इतना ही नहीं वरिष्ठता के प्रस्ताव को वेबसाइट पर डालकर सुझाव भी मंगाए जाएंगे।

तंत्र में आमूल चूल परिवर्तन करने वाले ये दिशानिर्देश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने वरिष्ठ वकील इंद्रा जयसिंह की याचिका का निपटारा करते हुए दिये। जयसिंह ने वरिष्ठता का दर्जा देने की प्रक्रिया पर सवाल उठाये थे और पारदर्शी तंत्र बनाने की मांग की थी। कुछ और याचिकाएं भी थीं जिनमें ऐसी मांग की गई थी।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि वरिष्ठता का दर्जा देने के लिए कमेटी फार डिजिग्नेशन आफ सीनियर्स विचार करेगी। सुप्रीम कोर्ट की कमेटी में मुख्य न्यायाधीश, दो वरिष्ठतम न्यायाधीश और अटार्नी जनरल होंगे। ये चार सदस्य बार एसोसिएशन से एक सदस्य को नामित करेंगे। कुल पांच सदस्यों की कमेटी होगी। हाईकोर्ट के मामले में कमेटी की अध्यक्षता संबंधित हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश करेंगे। इसके अलावा दो वरिष्ठ न्यायाधीश और एडवोकेट जनरल होंगे। ये चारो सदस्य मिल कर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के एक सदस्य को नामित करेंगे। इस कमेटी को मदद करने के लिए एक सचिवालय होगा।

स्थाई समिति वकील के ब्योरे के आधार पर वकील का साक्षात्कार लेगी और अंकों के आधार पर आकलन करेगी। स्थाई समिति सारे आकलन के बाद लिस्ट तैयार करके फुल कोर्ट की मंजूरी के लिए भेजेगी। फुल कोर्ट इस पर सीक्रेट बैलेट या बहुमत के आधार पर निर्णय लेगी। फुल कोर्ट से जिन नामों को मंजूरी नहीं मिल पाएगी उन्हें दो वर्ष बाद दोबारा से आवेदन करने का हक होगा। इतना ही नहीं कदाचार के मामलों में फुल कोर्ट वरिष्ठता के दर्जे की पुर्न समीक्षा कर सकता है और उसे वापस भी ले सकता है।

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By Manish Negi