यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 11, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
जजों की नियुक्ति में देरी से सुप्रीम कोर्ट नाराज, प्रस्तावित नामों पर केंद्र ने नहीं दी है मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के प्रति नाराजगी जाहिर की।कालेजियम की ओर से जज के तौर पर नियुक्ति के लिए नाम ...और पढ़ें

नई दिल्ली, आनलाइन डेस्क। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को केंद्र के प्रति नाराजगी जाहिर की। दरअसल कालेजियम की ओर से जज के तौर पर नियुक्ति के लिए नाम भेजे गए थे, जिसपर सरकार की तरफ से निर्णय नहीं लिया गया। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय विधि सचिव को नोटिस जारी किया है और जवाब की मांग की है। कोर्ट ने कहा कि सरकार इस तरह नामों को रोक नहीं सकती। इसके कारण कई अच्छे नामों को वापस लिया जाता है।
केंद्र को सुप्रीम कोर्ट की फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र द्वारा नामों को लंबित रखे जाने पर नाराजगी जाहिर की है। सरकार न तो नामों की नियुक्ति करती है और न ही अपनी आपत्ति के बारे में बताती है। केंद्र के पास 10 नाम लंबित हैं। इन्हें सुप्रीम कोर्ट कालेजियम की ओर से दोबारा प्रस्तावित किया गया है। बता दें कि आज सुप्रीम कोर्ट में कालेजियम द्वारा प्रस्तावित जजों के नाम को मंजूरी देने में केंद्र की ओर से हो रही देरी मामले में सुनवाई की गई। सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा कि जस्टिस दीपांकर दत्ता के नाम का प्रस्ताव पांच सप्ताह पहले रखा गया था। इसे मंजूरी मिल जानी चाहिए थी।
केंद्र सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दूसरी बार नामों का प्रस्ताव पेश करने के बाद नियुक्ति जारी की जानी चाहिए थी। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ शब्दों में यह भी कहा है कि नामों को होल्ड पर रखना स्वीकार्य नहीं है। यह एक तरह का उपकरण बनता जा रहा है, जो इन व्यक्तियों को अपना नाम वापस लेने के लिए मजबूर करता है जो पहले हुआ है। कालेजियम द्वारा प्रस्तावित नामों में जयतोष नाम के व्यक्ति का हाल ही में निधन हो गया है।
