नई दिल्ली, आइएएनएस। कोविड-19 के टीकाकरण कार्यक्रम के चलते पंचायत चुनाव टालने की आंध्र प्रदेश सरकार की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने अपनी नाराजगी जताई है। साथ ही, आंध्र प्रदेश सरकार की हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देनेवाली याचिका को खारिज कर दिया है। जस्टिस संजय किशन कौल और ऋषिकेश रॉय की खंडपीठ ने सोमवार को कहा कि राज्य चुनाव आयोग की ओर से आठ जनवरी को जारी आदेश को रोका नहीं जा सकता है।

इस आदेश में आयोग ने स्थानीय निकाय चुनाव के कार्यक्रम की अधिसूचना जारी की है। खंडपीठ ने राज्य चुनाव आयुक्त एन.रमेश कुमार के खिलाफ प्रस्ताव पास करने को भी दो प्रशासनों के बीच अहम की लड़ाई करार दिया है। उन्होंने कहा कि अहम की यह लड़ाई विधि की विहीनता ही है। हम कानून की विलुप्तता की इजाजत नहीं दे सकते। उन्होंने कहा कि एन.रमेश कुमार के खिलाफ आखिर प्रस्ताव कैसे पारित किया जा सकता है? उन्हें अहम की लड़ाई में नहीं घसीटा जा सकता है। एन.रमेश कुमार ने ही चुनाव कार्यक्रम की अधिसूचना जारी की थी।

आंध्र प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने पेश होते हुए सर्वोच्च अदालत से अपील की कि चुनाव को मार्च तक टाल दें, चूंकि फरवरी अंत तक तो कोविड-19 की रोकथाम के लिए टीकाकरण कार्यक्रम ही चलेगा। इस पर खंडपीठ ने जवाब दिया कि आप एकल जज (आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट) के फैसले का समर्थन करते हैं जिसने कोई वजह ही नहीं दी है।

सर्वोच्च अदालत ने आग्रहपूर्वक कहा कि अदालत हर राजनीतिक और प्रशासनिक फैसले में दखल नहीं दे सकती है। हम हर किसी का काम अपने हाथ में नहीं ले सकते हैं। कुछ फैसले राजनीतिक और प्रशासनिक होते हैं। कुछ फैसले चुनाव आयोग को लेने होते हैं। खंडपीठ ने कहा कि यह याचिका असली मुद्दा नहीं है। इसमें कुछ और भी बात है।

कोर्ट ने कहा कि वैश्विक महामारी के दौरान ही चुनाव कराए जा चुके हैं। फिर बड़े अचरज की बात है कि आंध्र प्रदेश सरकार को इससे इतनी आपत्ति क्यों है? खंडपीठ ने कहा कि कई राज्यों में इस दौरान चुनाव हुए हैं। केरल में चुनाव के बाद कोविड के मामले बढ़े थे लेकिन हम यह नहीं कह सकते हैं कि चुनाव उसकी वजह थे।

राज्य चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील रंजीत कुमार और के. परमेश्वर ने कहा कि इस मामले में संघ के एक कर्मचारी और कुछ डॉक्टरों का दखल बेहद शोचनीय है। उल्लेखनीय है कि 21 जनवरी को हाई कोर्ट की डिविजन बेंच के फैसले को आंध्र प्रदेश सरकार ने सर्वोच्च अदालत में चुनौती दी है। इससे पहले एकल जज ने राज्य सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया था। उस फैसले में राज्य चुनाव आयोग की निकाय चुनाव की तैयारियों को स्थगित करने का आदेश दिया गया था।

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