नई दिल्ली, प्रेट्र। दुष्कर्म आरोपित से पीड़िता से विवाह करने की बात अदालती रिकार्ड में दर्ज तथ्यों के आधार पर पूछी गई थी। आरोपित जो कि लड़की का रिश्तेदार भी है, ने कहा था कि वह लड़की के 18 साल की उम्र पार करने के बाद शादी कर लेगा। यह बात सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी की ओर से स्पष्ट की गई।

उल्लेखनीय है सोमवार को दुष्कर्म के एक मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने आरोपित से पूछा था कि क्या वह पीड़िता से शादी करने को तैयार है। आरोपित ने बांबे हाई कोर्ट की औरंगाबाद पीठ द्वारा अपनी जमानत खारिज किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उसे चार सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण दे दिया था। इस पीठ में जस्टिस एसए बोपन्ना और जस्टिस वी रामासुब्रह्मण्यन भी शामिल थे।

मामला मीडिया में आने पर महिला अधिकारों से जुड़े कई संगठनों, बुद्धिजीवियों, लेखकों और प्रतिष्ठित नागरिकों ने खुला पत्र लिखकर चीफ जस्टिस से माफी मांगने और टिप्पणी वापस लेने की मांग की थी। माकपा नेता बृंदा करात ने भी चीफ जस्टिस से अपनी टिप्पणी वापस लेने की मांग कर दी।

इस पर सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आलोचना को अनुचित बताते हुए कहा कि यह टिप्पणी न्यायिक रिकार्ड के आधार पर की गई थी। उन्होंने कहा कि इस मामले में पीड़ित लड़की जब अपनी मां के साथ दुष्कर्म की एफआइआर दर्ज कराने पहुंची तो आरोपित की मां ने दोनों से अपने बेटे की गलती मानते हुए कहा कि वह लड़की को अपनी बहू बनाने को तैयार हैं। इसके बाद दो जून 2018 को जब लड़की बालिग हुई तो उसकी मां ने लड़के की मां से वादे के मुताबिक शादी की बात की। लेकिन लड़के की मां, शादी की बात से मुकर गई। इस पर लड़की की ओर से दुष्कर्म की रिपोर्ट लिखा दी गई। इसके बाद आरोपित जो कि लड़की का रिश्तेदार भी है, की ओर से फिर शादी करने की मिन्नतें की जाने लगीं। कोर्ट ने इसी रिकार्ड के अनुसार आरोपित से पूछा कि क्या वह शादी के लिए तैयार है। शादी को तैयार हो तो हम याचिका पर विचार करें नहीं तो जेल जाओ। पीठ ने यह भी कहा था कि हम किसी तरह का दबाव नहीं बना रहे हैं। पीठ ने इसके बाद याचिका निस्तारित करते हुए उसे संबंधित अदालत में जमानत अर्जी देने का निर्देश दिया था।

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