जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ की रमन सिंह सरकार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टर सौदे की एसआईटी जांच की मांग खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार को हेलीकाप्टर का चयन करने का अधिकार है। ऐसा कोई सबूत भी सामने नहीं आया, जिससे इसे कम कीमत पर खरीदे जा सकने की बात साबित होती हो।

इतना ही नहीं कोर्ट ने राज्य के मुख्यमंत्री रमन सिंह के पुत्र अभिषेक सिंह को भी क्लीनचिट देते हुए कहा है कि पहली निगाह में ऐसा कोई सबूत रिकार्ड पर नहीं आया जिससे साबित होता हो कि अभिषेक सिंह को इस सौदे से फायदा पहुंचा था। कोर्ट ने कहा कि वो सौदे के प्रक्रियात्मक अनियमितताओं पर विचार करना जरूरी नहीं समझते।

ये फैसला न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल व न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने स्वराज अभियान व दो अन्य की ओर से दाखिल जनहित याचिकाओं को खारिज करते हुए सुनाया है। याचिकाओं में अगस्ता हेलीकाप्टर सौदे में दलाली का आरोप लगाते हुए एसआईटी जांच की मांग की गई थी। ये भी आरोप लगाया गया था कि इस सौदे से मुख्यमंत्री रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह को फायदा पहुंचा था।

कोर्ट ने फैसले में कहा है कि उन्हें एसआईटी जांच की मांग स्वीकारे जाने का कोई आधार नजर नहीं आता। इस बात पर कोई विवाद नहीं है कि राज्य सरकार को हेलीकाप्टर चयन करने का अधिकार है। रिकार्ड पर ऐसा कुछ नहीं आया जिससे साबित होता हो कि ये हेलीकाप्टर कम कीमत में खरीदा जा सकता था। न ही कोई व्यक्ति इससे बेहतर डील देने के लिए आगे आया था। ऐसे में जब तक इस बात के साफ सबूत न हो कि शार्प ओशियन इनवेस्टमेंट लिमिटेड कंपनी को कमीशन देने के कारण राजस्व का नुकसान हुआ, तब तक ये कोर्ट मामले में दखल नहीं देगा। कोर्ट ने कहा कि सीएजी रिपोर्ट में भी इस सौदे मे बाहरी हस्तक्षेप की बात नहीं कही गई है। जबतक सौदे में बाहरी दखलंदाजी साबित न होती हो तबतक मोटे तौर पर इस कोर्ट के मामले में दखल देने और सौदे की जांच की प्रार्थना स्वीकार करने का कोई केस नहीं बनता।

पीठ ने कहा कि मामले की मेरिट पर विचार करने के बाद उन्हें राज्य सरकार की इस आपत्ति पर विचार करने की जरूरत नहीं लगती कि याचिका राजनैतिक लाभ लेने के लिए दाखिल की गई है और इस पर सुनवाई नहीं की जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि कानून की तय व्यवस्था है कि जबतक वास्तविक जनहित न शामिल हो कोर्ट को कार्यपालिका के फैसलों में दखल नहीं देना चाहिए। हालांकि इस पर कोई रोक नहीं है अगर कोर्ट को ठीक लगता है तो वह मामले पर विचार कर सकता है। कोर्ट ने कहा कि स्पष्ट रूप से जनहित का मुद्दा शामिल हुए बगैर अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल राजनैतिक प्रतिद्वंदी की याचिका महज प्रक्रियात्मक अनियमितताओं के आरोपों पर नहीं सुनी जा सकती। उन मामलों को पीडि़त पक्ष उचित फोरम पर चुनौती दे सकता है।

ये मामला छत्तीसगढ़ में अगस्ता हेलीकाप्टर की खरीद से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि राज्य सरकार ने 26 अक्टूबर 2017 को शार्प ओशियन इनवेस्टमेंट लिमिटेड से हेलीकाप्टर खरीद सौदा किया था जिसमें तय प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ था और राज्य को राजस्व की हानि हुई थी। इतना ही नहीं सौदे में दलाली के आरोप लगाए गये थे और सौदे से मुख्यमंत्री के पुत्र अभिषेक सिंह को लाभ पहुंचने की बात भी कही गई थी। कहा गया था कि सीएजी रिपोर्ट में इस सौदे से राज्य को 65 लाख का नुकसान होने की बात कही गई है। कोर्ट ने पूरा मामला सुनने के बाद याचिका को आधारहीन बताते हुए खारिज कर दिया।

Posted By: Tilak Raj