सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध को बताया ‘डिजिटल डकैती’, दो आरोपियों पर लंबित 30 से ज्यादा केस क्लब करने से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध को 'डिजिटल डकैती' करार देते हुए 12 राज्यों में दो आरोपियों के खिलाफ लंबित 30 ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध को डिजिटल डकैती बताया
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध को 'डिजिटल डकैती' कहा।
12 राज्यों में 30 से अधिक केस क्लब करने से इनकार।
वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले गिरोहों की निंदा की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने साइबर अपराध को ‘डिजिटल डकैती’ बताते हुए दो लोगों के खिलाफ 12 राज्यों में लंबित 30 से अधिक आपराधिक शिकायतों को एक जगह करने से इन्कार कर दिया। आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनी के खाते का इस्तेमाल विभिन्न अपराधों को अंजाम देने के लिए म्यूल खाते के रूप में करने दिया।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्या बागची और वी. मोहना की पीठ ने बुधवार को कहा,‘डिजिटल गिरफ्तारियां और ऐसे साइबर अपराध डिजिटल डकैती हैं… ऐसे लोगों को कोई न्यायिक मंच देने का सवाल ही नहीं है।’
डिजिटल गिरफ्तारी के जरिए वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने वाले संगठित साइबर अपराध गिरोहों की कड़ी निंदा करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इसमें शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, ‘केरलम के एर्नाकुलम के 81 वर्षीय व्यक्ति से 1.90 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई और उनकी रकम आपके म्यूल खाते में जमा की गई।’
म्यूल खाता ऐसा बैंक खाता है, जिसका उपयोग साइबर अपराधी अवैध रूप से ठगी, आनलाइन फ्राड या मनी लांड्रिंग के पैसे ट्रांसफर करने या छिपाने के लिए करते हैं।
गौरव कुमार साहा और निधि भंडारी की याचिका पर विचार से इन्कार करते हुए पीठ ने कहा,‘आपने डिजिटल गिरफ्तारी जैसे साइबर अपराध के लिए अपनी कंपनी के खाते का इस्तेमाल करने का फैसला किया।’
पीठ ने आरोपितों को ऐसी कार्यवाही के जरिए अलग-अलग राज्यों में जांच बाधित करने की अनुमति देने से इन्कार कर दिया। जस्टिस बागची ने कहा,‘अपनी सुविधा की जगह पर मामलों के स्थानांतरण की मांग करने का आपका अधिकार पीड़ितों और जांच एजेंसी के अधिकारों पर हावी नहीं हो सकता… अगर दिल्ली पुलिस जांच की सुविधा के लिए ऐसा कहे, तो हम इस पर विचार कर सकते हैं।’
अंत में याचिकाकर्ता ने याचिका वापस ले ली। आरोपितों के खिलाफ साइबर अपराध से जुड़े 35 आपराधिक मामले दिल्ली, महाराष्ट्र, केरलम, तेलंगाना और गुजरात समेत कई राज्यों में लंबित हैं।
सोर्स- न्यूज एजेंसी PTI के इनपुट के अनुसार
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