सुप्रीम कोर्ट की मैतेयी-कुकी समुदायों को दोटूक, कहा- लड़ते-लड़ते थक गए होंगे, अब शांति बहाली के बारे में सोचें
सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में तीन साल से ज्यादा समय से जारी जातीय हिंसा में शामिल कुकी और मैतेयी समुदायों से शांति बहाली पर विचार करने की अपील की है।

सुप्रीम कोर्ट की मैतेयी-कुकी समुदायों को दोटूक, कहा- लड़ते-लड़ते थक गए होंगे
HighLights
दोनों समुदायों से सड़कों और राजमार्गों को चालू करने को कहा
शीर्ष अदालत ने कहा, सड़कों को बंद करना किसी के हित में नहीं
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में तीन साल से ज्यादा समय से जारी जातीय हिंसा में शामिल कुकी और मैतेयी समुदायों से शांति बहाली पर विचार करने की अपील की है।
शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को दोनों समुदायों से कहा, "आप लड़ते-लड़ते थक गए होंगे। शांति बहाल करने और सड़कों व राजमार्गों को चालू करने में बारे में सोचें।
मई 2023 में इंफाल घाटी में रहने वाले मैतेयी और आस-पास के पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा शुरू होने के बाद से 260 से ज्यादा लोग मारे गए और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने दोनों समुदायों से कहा कि सड़कों और राजमार्गों को अवरुद्ध करना किसी के हित नहीं है और इन्हें खोलने का प्रयास किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता कुकी महिला मानवाधिकार संगठन और मध्यस्थ इंटरनेशनल मैतेयी आर्गनाइजेशन से पीठ ने कहा कि आप लड़ते-लड़ते थक गए होंगे। दोनों समुदायों ने बहुत मुश्किलों का सामना किया है।
शांति बहाल करने और सड़कों व राजमार्गों को चालू करने के बारे में सोचें। राजमार्ग किसी भी क्षेत्र के लिए लाइफलाइन होते हैं, क्योंकि इनके माध्यम से आवश्यक वस्तुओं की आवाजाही होती है।
