नई दिल्ली, ब्यूरो। डीज़ल टैक्सियों को रियायत देने के मसले पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट की डीजल टैक्सियों को दिल्ली NCR में चलने की इजाजत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इन टैक्सियों को प्वाइंट टू प्वाइंट चलने की इजाजत दी है। इसके साथ ये टैक्सियां दिल्ली-एनसीआर में तब तक चल सकेंगी जब तक इनका परमिट खत्म नहीं हो जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऑल इंडिया परमिट वाली टैक्सियों की सेफ्टी, सिक्योरिटी और किराए को लेकर केंद्र और दिल्ली सरकार के नियमों का पालन करना होगा। आपकों बता दें कि ये ऑल इंडिया परमिट की अवधि पांच साल तक होती है, पांच साल बाद ये परिमट अपने रद्द हो जाएगा। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली और NCR मे नई डीजल टैक्सी के रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाई दी है।

गौरतलब है कि सोमवार को हुई सुनवाई में इन गाड़ियों के लिए राहत मांगते हुए नैसकॉम ने कहा था कि बीपीओ उद्योग 14 हज़ार डीज़ल गाड़ियां चल रही हैं जो कर्मचारियों को लाती-ले जाती हैं। उन्हें राहत देना जरूरी है।

नैसकॉम ने जताई थी आपत्ति

इस प्रतिबंध से परेशान बीपीओ व सॉफ्टवेयर कंपनियों के संगठन नैसकॉम की तरफ से दलील दी गई कि एनसीआर में काम करने वाले ढाई लाख लोगों के रोजगार के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं उठी हैं क्योंकि कंपनियों के लिए महिला कर्मचारियों को घर से ऑफिस लाने व पहुंचाने की व्यवस्था नहीं हो पा रही है।

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कल हुई सुनवाई में केंद्र सरकार ने दिल्ली में 2000 सीसी से ज्यादा की डीजल गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन पर रोक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कोर्ट को अपने फैसले पर पर कायम नहीं रहना चाहिए, क्योंकि इससे सरकार की मेक इन इंडिया पॉलिसी पर असर पड़ेगा।

राजधानी में डीजल टैक्सियों पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने के निर्णय के खिलाफ नैसकॉम ( बीपीओ सर्विस) भी सुप्रीम कोर्ट पहुंची। इस मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार ने कहा कि सरकार की मेक इन इंडिया के तहत तय पालिसी की कंपनियां भारत आएं और नियमों के मुताबिक निर्माण करें। अगर कंपनियां वाहनों को नियमों के मुताबिक बना रही हैं तो कोर्ट को ऐसे मामलों की सुनवाई नहीं करनी चाहिए।

सुनवाई के दौरान रंजीत कुमार ने कहा कि सिर्फ वाहनों से ही प्रदूषण नहीं होता है। इसके और भी कारण हैं जिनमें निर्माण, धूल और कूड़ा जलाना आदि शामिल है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम यह नहीं कह रहे कि कोर्ट वाहनों के प्रदूषण के अलावा दूसरे पहलुओं पर गौर नहीं करेगा। क्या आपने कभी सड़क पर चलती गाड़ी का प्रदूषण लेवल चेक किया है?

सुप्रीम कोर्ट ने शर्त के साथ संशोधन की बात कही

नैसकॉम ने अपनी अर्जी में कहा है कि हमारे पास 14 हजार डीजल गाड़ियां हैं जो केवल पिक और ड्रॉप करती हैं। इन डीजल गाड़ियों के बंद होने पर व्यापक असर पड़ेगा।

इससे न सिर्फ कर्मचारियों की सुरक्षा बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर नैसकाम लिखित में अंडरटेकिंग दे दे कि वह अपनी गाड़ियों को सीएनजी में तब्दील कर लेगा तो आदेश में संशोधन कर सकते हैं।

Posted By: JP Yadav

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