'92 गवाहों का मुकर जाना चिंता की बात', सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में 22 आरोपियों को बरी करने पर SC का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट सोहराबुद्दीन शेख से जुड़े 2005 के कथित फेक एनकाउंटर मामले में 22 आरोपियों की बरी करने के बॉम्बे ...और पढ़ें

सोहराबुद्दीन केस में आरोपियों के बरी होने के मामले पर सुनवाई को तैयार सुप्रीम कोर्ट।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट सोहराबुद्दीन एनकाउंटर मामले की याचिका पर सहमत।
बॉम्बे हाई कोर्ट के 22 आरोपियों की बरी को चुनौती।
शीर्ष अदालत चुनिंदा गवाहों के बयानों की जांच करेगी।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट सोमवार को एक याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया। यह याचिका बॉम्बे हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती देती है जिसमें गैंगस्टर सोहराबुद्दीन शेख, उनकी पत्नी कौसर बी और साथी तुलसीराम प्रजापति से जुड़े 2005 के कथित फेक एनकाउंटर मामले में 21 पुलिसकर्मियों समेत 22 आरोपियों को बरी कर दिया गया था।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने सोहराबुद्दीन शेख के भाई नयाबुद्दीन शेख की याचिका पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में बॉम्बे हाई कोर्ट के 7 मई के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें आरोपियों को बरी करने के फैसले को सही ठहराया गया था।
'बरी करने के फैसले की करेंगे जांच'
बेंच ने संकेत दिया कि वह बरी करने से जुड़े चुनिंदा गवाहों के बयानों की जांच करेगी। सीजेआई ने कहा, "हम कुछ गवाहों के बयान देखना चाहेंगे। हम रिकॉर्ड नहीं मंगा रहे हैं। आपको जो भी तीन-चार बयान जरूरी लगते हैं, वे हमें दें। हम बरी करने के फैसले की जांच करेंगे।"
जस्टिस बागची ने कहा कि 92 अभियोजन पक्ष के गवाहों का मुकर जाना एक ऐसा मामला है जिस पर विचार करने की जरूरत है। खासकर यह देखने के लिए कि क्या ट्रायल निष्पक्ष और न्यायपूर्ण था। जस्टिस बागची ने कहा, "बानवे गवाहों का मुकर जाना चिंता की बात है। क्या ट्रायल निष्पक्ष और न्यायपूर्ण था... इस पर विचार किया जाना चाहिए।"
क्या है मामला?
इस मामले में बरी किए गए 22 आरोपियों में से 21 गुजरात और राजस्थान के पुलिस अधिकारी थे। बाकी बचा आरोपी गुजरात में एक फार्महाउस का मालिक था, जहां अभियोजन पक्ष के अनुसार सोहराबुद्दीन और कौसर बी को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, सोहराबुद्दीन, उनकी पत्नी और प्रजापति बस से हैदराबाद से महाराष्ट्र के सांगली जा रहे थे तभी 22-23 नवंबर 2005 की रात को एक पुलिस टीम ने उन्हें कथित तौर पर हिरासत में ले लिया।
कहा जाता है कि इस जोड़े और प्रजापति को अलग-अलग गाड़ियों में ले जाया गया था। सीबीआई के अनुसार, सोहराबुद्दीन की हत्या 26 नवंबर, 2005 को अहमदाबाद के पास गुजरात और राजस्थान पुलिस के साथ हुई एक मुठभेड़ में कर दी गई थी। आरोप है कि तीन दिन बाद कौसर बी की भी हत्या कर दी गई थी।
प्रजापति, जो उदयपुर सेंट्रल जेल में बंद था और जिसे इस कथित मुठभेड़ का मुख्य गवाह माना जाता था वह 27 दिसंबर, 2006 को गुजरात-राजस्थान बॉर्डर के पास एक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था।
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