'बिना ठोस सबूत किसी काम को अनैतिक बताकर सजा देना सही नहीं', दुष्कर्म के लिए सजा सुनाने वाले को SC ने किया बरी
सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में 10 साल की सजा पाए व्यक्ति को बरी कर दिया, यह कहते ...और पढ़ें

बिना ठोस सबूत किसी काम को अनैतिक बताकर सजा देना सही नहीं- SC
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में व्यक्ति को बरी किया।
बिना सबूत अनैतिकता पर सजा देना सही नहीं: कोर्ट।
पीड़िता का बयान अविश्वसनीय और विरोधाभासों से भरा पाया गया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दुष्कर्म के मामले में 10 वर्ष की सजा पाए व्यक्ति को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बिना किसी सुबूत के सिर्फ किसी काम के अनैतिक होने से सजा को सही नहीं ठहराया जा सकता।
जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने कथित पीड़िता के बयान को विरोधाभासों का पुलिंदा व बिल्कुल भी विश्वसनीय नहीं बताते हुए कहा कि उसके बयान का कुछ हिस्सा स्वीकार और कुछ अस्वीकार करना सही नहीं है।
पीठ ने उस व्यक्ति की अपील पर यह फैसला सुनाया, जिसने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के सितंबर, 2013 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने लुधियाना ट्रायल कोर्ट के जून, 2012 के सजा व दोषसिद्धि के फैसले को बरकरार रखा था।
ट्रायल कोर्ट ने उसे अपहरण के आरोपों से बरी कर दिया था, लेकिन दुष्कर्म का दोषी ठहराया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपित ने पीड़िता को जून, 2009 में लुधियाना के एक फ्लैट में दो दिन तक रखकर दुष्कर्म किया।
इसके बाद वह उसे स्कूटर पर मलेरकोटला ले गया, जहां उसने एक बंद फैक्ट्री में भी दुष्कर्म किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसके बयानों से साफ है कि वह अपनी मर्जी से आरोपित के साथ पहले फ्लैट पर और फिर मलेरकोटला गई थी। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
