नई दिल्ली, पीटीआइ। सुप्रीम कोर्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसलों से बीत रहे वर्ष 2019 में देश और देश की राजनीति पर अमिट छाप छोड़ी है। अयोध्या में जन्मभूमि पर राम मंदिर के निर्माण की राह खोलने के साथ ही अरबों के राफेल विमान सौदे को भी क्लीनचिट दे दी। हालांकि तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगा, लेकिन वह उससे पाक-साफ बाहर निकल आए।

पूर्व सीजेआइ रंजन गोगोई पर आरोप

साल की शुरुआत में ही देश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई विवादों में तब घिर गए जब उन पर सुप्रीम कोर्ट की एक पूर्व कर्मचारी ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। लेकिन इस विवाद पर तब विराम लग गया जब मौजूदा सीजेआइ एसए बोबडे के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट की आंतरिक कमेटी की जांच में उन्हें निर्दोष करार दिया गया।

अनुच्छेद 370 पर याचिकाएं खारिज

जम्मू और कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के केंद्र सरकार के ऐतिहासिक फैसले के खिलाफ भी सर्वोच्च अदालत में कई याचिकाएं दायर की गईं। राज्य में शांति कायम रखने के लिए फारुक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती जैसी नेताओं को नजरबंद कर लिया गया। पांच जजों की संविधान पीठ ने सरकार के इस फैसले को चुनौती दिए जाने को भी खारिज कर दिया।

राम मंदिर निर्माण की खोली राह

वर्ष 2019 को हमेशा अयोध्या में राम मंदिर विवाद सुलझाने के लिए याद रखा जाएगा। तत्कालीन सीजेआइ गोगोई के नेतृत्व में पांच जजों की संविधान पीठ ने 40 दिनों की नियमित सुनवाई के बाद सर्वसम्मति से मंदिर निर्माण के पक्ष में फैसला दिया। यह इतिहास में दूसरी सबसे लंबी सुनवाई रही। मुसलमानों को भी अयोध्या में कहीं और पांच एकड़ जमीन देने का फैसला सुनाया।

सबरीमाला मंदिर पर संविधान पीठ को सौंपा मामला

केरल के सबरीमाला मंदिर मामले में सर्वोच्च अदालत ने न्यायिक जांच का दायरा बढ़ाया। विभिन्न धर्मों में महिलाओं से होने वाले भेदभाव के मामलों को सात जजों की संविधान पीठ को सौंप दिया है। बड़ी पीठ मुस्लिम और पारसी महिलाओं से होने वाले भेदभाव पर अपना फैसला देगी।

राफेल पर विपक्ष का करारा झटका

राजनीतिक रूप से संवेदनशील राफेल युद्धक विमान मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार का पक्ष लिया और सीबीआइ जांच के लिए दायर विभिन्न समीक्षा याचिकाओं को खारिज कर दिया। इस सौदे से भारत को फ्रांस से अस्त-शस्त्र से सुसज्जित 36 राफेल विमान मिलेंगे।

RTI के दायरे में सीजेआइ ऑफिस

इस साल सर्वोच्च अदालत ने सीजेआइ ऑफिस को सूचना के अधिकार कानून के दायरे में लाकर एक अच्छी नजीर पेश की। इस फैसले से अब सीजेआइ के कामकाज संबंधी जानकारियां सार्वजनिक की जा सकेंगी।

Posted By: Manish Pandey

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