तिरुवनंतपुरम, आइएएनएस। केरल में मुस्लिम एजुकेशनल सोसाइटी (एमईएस) ने चेहरों को कवर करने वाली सभी चीजों पर एक सर्कुलर जारी कर बैन लगा दिया है, जिसे अब केरल के उच्च शिक्षा मंत्री केटी जलील से भी समर्थन मिला है। बता दें कि श्रीलंका में हुए ईस्टर वाले दिन बम धमाकों के बाद से ही बुर्का बैन व चेहरा कवर करने वाली सभी चीजों पर बैन की आवाज तेज हो गई है।

जलील ने मीडिया से बातचीत में कहा कि यह समय मुस्लिम धार्मिक संगठन को आत्मनिरीक्षण करने का है कि जो नियम और रीति-रिवाज इस्लाम के लिए भी निर्धारित नहीं है, उसका पालन करना सही है या नहीं। उन्होंने आगे कहा, 'यहां तक कि हज और प्रार्थना के दौरान भी महिलाएं चेहरे नहीं ढकती हैं, लेकिन कुछ लोग है जो कहते है कि महिलाओं को बुर्का पहनना चाहिए, जो की सही नहीं है'।

बता दें केरल में मुस्लिम एजुकेशनल सोसाइटी (एमईएस) ने अपने सभी शिक्षण संस्थानों में बुर्के, नकाब समेत चेहरे को ढंकने वाले सभी पहनावों पर प्रतिबंध लगा दिया है। एमईएस का मुख्यालय कोझिकोड में है और पूरे राज्य में इसके 150 से अधिक शिक्षण संस्थान हैं।

एमईएस अध्यक्ष फजल गफूर ने गुरुवार को बताया कि वर्ष 2019-20 के आगामी शैक्षणिक सत्र से इस प्रतिबंध को उनके शिक्षण संस्थान के सभी परिसरों में लागू कर दिया जाएगा। हालांकि, इसका विरोध समस्थान केरल जमायतुल उलमा ने किया, जो सैय्यद मुहम्मद जाफरी मुथुकोया थंगल के नेतृत्व में एक लोकप्रिय मुस्लिम धार्मिक संगठन है। संगठन द्वारा एमईएस को विश्वास और धर्म से संबंधित मुद्दों में हस्तक्षेप नहीं करने के लिए कहा है।

सीपीआई-एम समर्थित उम्मीदवार के रूप में जीतने वाले तीन बार के विधायक ने कहा, 'सरकार का इस मुद्दे में हस्तक्षेप करने का कोई इरादा नहीं है और अगर जरूरत पड़ी तो मैं इस मुद्दे को सुलझाने के लिए धार्मिक प्रमुखों के साथ बातचीत शुरू करने का नेतृत्व करूंगा।'

गौरतलब है कि गुरुवार को बुर्के पर प्रतिबंध की मांग के बीच प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने एक नई मांग रख दी थी। उन्होंने कहा कि बुर्के के बारे में मुझे जानकारी कम है। अपने घर में भी मैंने बुर्के का चलन नहीं देखा। श्रीलंका में जो प्रतिबंध लगाया गया है, वह भी चेहरे को ढकने को लेकर है। मुझे बुर्के पर प्रतिबंध से कोई आपत्ति नहीं, लेकिन सरकार घोषणा करे कि राजस्थान में कोई महिला घूंघट नहीं डालेगी।

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