बालासोर, एजेंसी। सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल 'ब्रह्मोस' का ओडिशा के चांदीपुर सो सोमवार को सफल परीक्षण किया गया। भारी बारिश के बावजूद जमीन से जमीन पर प्रहार करने वाली प्रहार करने वाली मिसाइल 'ब्रह्मोस' का सुबह 10:30 बजे बालेश्वर के चांदीपुर से परीक्षण किया गया। यह परीक्षण ब्रह्मोस के जीवनकाल बढ़ाने के लिए किया गया है। यह परीक्षण इस मिसाइल की एक्सपायरी डेट को 10 साल से बढ़ाकर 15 साल करने की कवायद का हिस्सा है। ब्रह्मोस भारत और रूस के द्वारा विकसित की गई अब तक की सबसे आधुनिक प्रक्षेपास्त्र प्रणाली है और इसने भारत को मिसाइल तकनीक में अग्रणी देश बना दिया है।

बता दें कि ब्रह्मोस एयरोस्पेस भारत के रक्षा शोध और विकास संगठन (डीआरडीओ) व रूस के एनपीओएम ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। यह मिसाइल ध्वनि की आवाज से भी तीन गुना अधिक रफ्तार से उड़ान भरती है। इस परीक्षण से सशस्त्र सेनाओं को अधिक समय के लिए मिसाइल मिल सकेगा।

ब्रह्मोस को पनडुब्बी से, पानी के जहाज से, विमान से या जमीन से भी छोड़ा जा सकता है। यह मिसाइल 290 किमी मार करने की क्षमता रखती है। सेना में शामिल हो चुकी इस मिसाइल का विगत कई सालों से सफलता पूर्वक परीक्षण किया जाता रहा है। 

ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र है। क्रूज़ प्रक्षेपास्त्र उसे कहते हैं जो कम ऊंचाई पर तेजी से उड़ान भरती है और इस तरह से रडार की आँख से बच जाती है। ब्रह्मोस की विशेषता यह है कि इसे जमीन, हवा, पनडुब्बी और युद्धपोत से यानी कि लगभग कहीं से भी दागा जा सकता है। यही नहीं इस प्रक्षेपास्त्र को पारम्परिक प्रक्षेपक के अलावा उर्ध्वगामी यानी कि वर्टिकल प्रक्षेपक से भी दागा जा सकता है।

ब्रह्मोस का विकास ब्रह्मोस कोर्पोरेशन किया जा रहा है। यह कम्पनी भारत के डीआरडीओ और रूस के एनपीओ मशीनोस्त्रोयेनिशिया का सयुंक्त उपक्रम है। यह रूस की पी-800 ओंकिस क्रूज मिसाइल की प्रौद्योगिकी पर आधारित है। ब्रह्मोस नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मस्कवा नदी पर रखा गया है। रूस इस परियोजना में प्रक्षेपास्त्र तकनीक उपलब्ध करवा रहा है और उड़ान के दौरान मार्गदर्शन करने की क्षमता भारत के द्वारा विकसित की गई है।

प्रक्षेपास्त्र तकनीक में दुनिया का कोई भी प्रक्षेपास्त्र तेज गति से आक्रमण के मामले में ब्रह्मोस की बराबरी नहीं कर सकता। इसकी खूबियां इसे दुनिया की सबसे तेज़ मारक मिसाइल बनाती है। यहां तक की अमरीका की टॉम हॉक मिसाइल भी इसके आगे फिसड्डी साबित होती है।

Posted By: Ramesh Mishra

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