गन्ने की कीमत पर बढ़ा विवाद, किसान 575 रुपये FRP की गारंटी पर अड़े; केंद्र ने बनाई उच्चस्तरीय समिति
गन्ने की कीमत को लेकर सरकार दुविधा में है, जहां किसान संगठन 575 रुपये प्रति क्विंटल एफआरपी की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं, जबकि वर्तमान एफआरपी 365 रुपये है।

किसान संगठनों ने मांगी एफआरपी की गारंटी

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अरविंद शर्मा, नई दिल्ली। गन्ने की कीमत को लेकर सरकार की दुविधा बढ़ गई है। वर्ष 2026-27 के लिए 10.25 प्रतिशत चीनी रिकवरी पर उचित एवं लाभकारी मूल्य (एफआरपी) 365 रुपये प्रति क्विंटल तय है, जबकि किसान संगठन 575 रुपये की कानूनी गारंटी मांग रहे हैं। बीच का रास्ता निकालने और किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र ने उच्चस्तरीय समिति बनाई है।
फिर भी सरकार के सामने किसानों को वाजिब मुनाफा दिलाने और चीनी मिलों को अनावश्यक बोझ से बचाने की चुनौती है। चीनी की बढ़ती कीमतों ने दबाव को और बढ़ा दिया है।
अखिल भारतीय किसान सभा ने गन्ने के न्यूनतम मूल्य में 210 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि के साथ चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये प्रति किलो तय करने की मांग की है। इन मांगों ने गन्ना खेती की लागत, किसानों के मुनाफे एवं चीनी मिलों की कमाई में हिस्सेदारी को बहस के केंद्र में ला दिया है।
गन्ने की कीमतों में राज्यों के बीच फासले ने भी बहस को हवा दी है। उत्तर प्रदेश में गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) 400 रुपये प्रति क्विंटल, हरियाणा में 415 रुपये और पंजाब में 416 रुपये है, जबकि छत्तीसगढ़ ने अपनी गन्ना खरीदी दर 355 रुपये से बढ़ाकर 425 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है। यह दर पेराई सत्र 2025-26 से लागू होगी।
हालांकि, दरों की तुलना करते समय उनके आधार और भुगतान की शर्तों को समझना जरूरी है। एफआरपी केंद्र की ओर से तय न्यूनतम मूल्य है, जबकि एसएपी राज्य सरकारें घोषित करती हैं।
महाराष्ट्र और कर्नाटक में भुगतान एफआरपी, चीनी रिकवरी और संबंधित मिलों की व्यवस्था के अनुसार होता है। इसलिए केवल घोषित कीमतों का अंतर किसानों की वास्तविक आय की पूरी तस्वीर नहीं बताता।
किसानों के दबाव के बाद केंद्र ने गन्ना मूल्य निर्धारण और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य पर विचार के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति बनाई है। किसान संगठनों ने समिति में गन्ना उत्पादक राज्यों की सरकारों और किसान संगठनों को प्रतिनिधित्व नहीं देने पर आपत्ति जताई है।
किसान संगठनों ने एथनाल और बिजली से होने वाली आय में किसानों को 57 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त हिस्सा देने की मांग भी उठाई है। तर्क है कि गन्ने से बनने वाले अन्य उत्पादों की कमाई किसानों तक पहुंचना चाहिए। चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये प्रति किलो करने की मांग भी इसी से जुड़ी है।
