अनंगपाल दीक्षित, अम्बिकापुर। इंदौर के बाद देश के दूसरे सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बनाने वाले छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर शहर में स्वच्छता को लेकर हर रोज नवाचार चल रहे हैं। यहां कि महिला समूह द्वारा संचालित ठोस कचरा निस्पादन केंद्र अपने आप में महिला सशक्तिकरण की मिसाल बना है। अब यहां वेस्ट वाटर मैनेजमेंट की दिशा में भी बेहतरीन काम हो रहा है।

हाल ही में अंबिकापुर शहर में सीवरेज वाटर के ट्रीटमेंट का प्राकृतिक तरीका विकसित किया गया है। शहर से निकलने वाला पूरा दूषित जल बहुत ही व्यवस्थित और पूर्णरूप से प्राकृतिक तरीके से उपयोग के योग्य बनाया जा रहा है। इस तरह शहर में रोजाना 42 लाख घन लीटर वेस्ट वाटर को शुद्ध कर दोबारा काम के उपयोग में लाया जा रहा है। जल संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर ऐसा प्रयोग करने वाला अम्बिकापुर नगर निगम संभवत: देश का पहला नगर निगम है।

लोगों की जागरूकता से सफल हो रही मुहिम

यहां ड्रेनेज वाटर से लेकर टॉयलेट तक के वेस्ट वाटर को उपयोग के लायक बनाया जा रहा है और शहर की जरूरत के मुताबिक अलग-अलग कामों में इसका इस्तेमाल भी हो रहा है। प्राकृतिक रूप से संपन्न् छत्तीसगढ़ के उत्तरी पहाड़ी इलाके के इस शहर में लोगों की पर्यावरण जागरूकता भी इस मुहिम के लिए बड़ी कामयाबी की वजह बनी है।

प्रदूषित हो चुके तालाब को बनाया स्वच्छ पानी का श्रोत

शहर के सबसे दूषित माने जाने वाले मरीन ड्राइव तालाब में आधे शहर का सीवरेज वाटर प्रवेश करता है। इससे तालाब की स्थिति काफी खराब हो चुकी थी। इस दूषित हो चुके तालाब को दोबारा जीवित करने और उसके पानी को शुद्ध कर शहर के उपयोग के लायक बनाने के लिए नगर निगम ने प्राकृतिक तरीका ढूंढ़ा। यहां तालाब के किनारे प्राकृतिक सीवरेज वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया। पौधों की हरियाली के साथ ही केंचुए और बत्तख पालन कर प्लांट में पानी को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करने के प्रारंभिक चरण की शुरूआत होती है।

इसके बाद प्लांट की भीतरी सतह के अंदर तालाब का पानी प्रवेश करता है। इस सतह में बड़े बोल्डर के बाद 40 एमएम गिट्टी फिर भी 20 एमएम गिट्टी डालकर पानी रोक दिया गया है। मरीन ड्राइव तालाब के पानी में वेस्ट मटेरियल से बना फ्लोटर छोड़ा गया है। फ्लोटर आकर्षक भी लग रहा है जिसमे लगाए गए पौधे पानी के हानिकारक रसायनों को खींच रहे हैं। इससे अब पानी में बदबू भी नहीं आ रही है। इस तरह यह पानी सेकंडरी उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त है और इस्तेमाल में लाया भी जा रहा है। इस काम में नगर निगम के कर्मचारियों के साथ ही स्वसहायता समूह की महिलाएं सहयोग कर रही हैं।

शहर में खत्म हुई जल समस्या

नगर निगम के कार्यपालन अभियंता व स्वच्छता के नोडल अधिकारी सुनील सिंह बताते हैं कि सर्वाधिक गंदगी वाले मरीन ड्राइव तालाब में प्राकृतिक रूप से सीवरेज वाटर को ट्रीटमेंट करने का काम सफल हुआ है और इसके बाद शहर के आधा दर्जन दूसरे तालाबों में भी इस तरह के प्राकृति ट्रिटमेंट प्लांट लगाए गए हैं। वेस्ट वाटर को रिसायकल करने के इस सिस्टम के साथ बड़ी तादात में शहर में जल संरक्षण का काम भी सफल हुआ है। पहले पेय जल की समस्या शहर में सामने आ रही थी, लेकिन अब शुद्ध किए गए सीवरेज वाटर का सेकंडरी उपयोग होने की वजह से पीने के पानी की कोई भी किल्लत नहीं है। हम प्रयास कर रहे हैं कि सिवरेज वाटर को और भी ज्यादा बेहतर तरीके से शुद्ध किया जाए, जिससे यह पीने के उपयोग में भी आ सके।

सेनीटेशन पार्क में भी लगा प्लांट

तालाबों में तैयार किए गए प्राकृतिक फिल्टर प्लांट से अलग शहर के सेनीटेशन पार्क में भी एक वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया गया है। यहां भी प्राकृतिक तरीके से ही टॉयलेट वाटर को शुद्ध करने का काम हो रहा है। अम्बिकापुर शहर में वाटर मैनेजमेंट के इस तरीके के साथ जल संरक्षण की दिशा में जो काम हो रहा है वह अपने आप में देश के दूसरे शहरों के लिए एक नजीर है, जो पानी की किल्लत से जूझ रहे हैं।

Posted By: Dhyanendra Singh

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