नई दिल्ली [हरिकिशन शर्मा]। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी की तारीफ करने वाली रिपोर्ट से वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने भले ही पल्ला झाड़ लिया हो, लेकिन उनकी ही सरकार ने एक बार फिर 'गुजरात मॉडल' की प्रशंसा की है। इस बार गुजरात का गुणगान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता वाले योजना आयोग ने किया है। आयोग ने अपनी वेबसाइट पर एक रिपोर्ट प्रकाशित कर बताया है कि मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के लिए बेहतर माहौल बनाने में किस तरह गुजरात का प्रदर्शन सर्वश्रेष्ठ श्रेणी में रहा है।

रिपोर्ट योजना आयोग ने ही तैयार कराई है। आयोग के लिए यह रिपोर्ट दुनिया की जानी मानी प्रबंधन सलाहकार कंपनी डिलॉयट ने तैयार की है। इसकी अहमियत इसलिए है, क्योंकि इसमें राज्य सरकारों के उन नियम-कानूनों का विश्लेषण किया है, जिनसे होकर मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों को अपना प्लांट लगाने और चलाने को गुजरना पड़ता है। अगर यह प्रक्रिया जटिल होती है तो कंपनियां उस राज्य में संयंत्र नहीं लगातीं। किसी भी राज्य के लिए मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र इसलिए जरूरी है, क्योंकि पढ़े-लिखे युवाओं को इसी क्षेत्र से ज्यादा नौकरियां मिलती हैं।

'मैन्यूफैक्चरिंग के लिए व्यावसायिक नियमन माहौल पर सर्वे - राज्य स्तरीय आकलन' शीर्षक वाली इस रिपोर्ट को योजना आयोग में औद्योगिक मामलों के प्रभारी अरुण मैरा ने फॉरवर्ड किया है। इस रिपोर्ट में मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों के लिए राज्यों के वित्त और कर कानून, श्रम कानून, ढांचागत सुविधाएं, भूमि व भवन कानून और पर्यावरण नियमों के आधार पर राज्यों की रैंकिंग की गई है। रिपोर्ट में गुजरात को सर्वश्रेष्ठ श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में गुजरात के अलावा भाजपा शासित तीन और राज्य छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान भी हैं। इसके अलावा तमिलनाडु और उड़ीसा, केरल, हरियाणा और आंध्र प्रदेश भी इसी श्रेणी में हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश के मैन्यूफैक्चरिंग जीडीपी में योगदान करने के मामले में गुजरात दूसरे नंबर पर है। इस राज्य ने वर्ष 2011-12 में देश के मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र के जीडीपी में 13.7 प्रतिशत योगदान किया।

योजना आयोग विगत में भी गुजरात की सराहना करता रहा है। आयोग ने कौशल विकास के क्षेत्र में गुजरात द्वारा किए गए उपायों की सराहना भी की थी। आयोग ने यह रिपोर्ट ऐसे समय जारी की है, जब वाणिज्य मंत्रालय के औद्योगिक नीति एवं संव‌र्द्धन विभाग (डीआइपीपी) की वेबसाइट पर दी गई एक रिपोर्ट पर राजनीतिक बवाल मचा है। इस रिपोर्ट में गुजरात की भूमि अधिग्रहण नीति की सराहना की गई थी। हालांकि बाद में आनंद शर्मा ने इस रिपोर्ट से पल्ला झाड़ लिया।

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