नई दिल्ली [नीलू रंजन]। रमजान के दौरान आतंकियों के खिलाफ आपरेशन बंद करने पर भले ही कुछ लोग सवाल उठा रहे हों, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सफल मान रही हैं। इससे न सिर्फ पाकिस्तान परस्त आतंकियों और अलगाववादियों का असली चेहरा बेनकाब करने में सफलता मिली है, बल्कि आम लोगों के बीच यह भी संदेश गया है कि दरअसल भारत ही घाटी में स्थायी शांति चाहता है।

रमजान के दौरान आपरेशन बंद करने की जरूरत बताते हुए सुरक्षा एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि घाटी में बड़ी आबादी अमन पसंद लोगों की है, लेकिन उनकी आवाज सुनने वाला कोई नहीं है। इसके साथ ही कुछ कश्मीरी युवा भी पाक प्रापेगेंडा के शिकार होकर पत्थरबाजी जैसी घटनाओं में संलिप्त हो जाते हैं। आपरेशन बंद कर इन दोनों समूहों के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश की गई, जो पूरी तरह सफल रही।

घाटी के युवाओं ने जिस तरह से गृहमंत्री राजनाथ सिंह का इस्तकबाल किया, उससे साफ है कि वहां के युवाओं को आतंक के अलावा भी अपना भविष्य दिखने लगा है। यही कारण है कि रमजान खत्म होने के ठीक पहले केंद्र सरकार ने कश्मीर के सभी ब्लाकों में खेलकूद की सुविधा विकसित करने के लिए 14 करोड़ रुपए जारी कर दिये थे।

आपरेशन बंद होने के दौरान आतंकी हमले बढ़ने के दावे को खारिज करते हुए वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पाकिस्तान स्थित आकाओं के इशारे पर आतंकी लगातार हिंसक घटनाओं को अंजाम देते रहे हैं। आतंकी इसके पहले भी जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना के जवानों को निशाना बनाते रहे हैं। यही सिलसिला रमजान के दौरान भी दिखा। पत्रकार सुजात बुखारी की हत्या जरूर नई बात है, लेकिन इसके पीछे आतंकियों और अलगाववादियों की हताशा ज्यादा नजर आती है। सुजात बुखारी लगातार कश्मीर में स्थायी शांति की बात कर रहे थे और अपने अखबार में इसे लिख रहे थे। इसके लिए वे बातचीत के भी पक्षधर थे।

पाकिस्तान भले ही शांति की बात करने वालों की आवाज बंद करने में जुटा हो, लेकिन सरकार आपरेशन बंद करने से बने सकारात्मक माहौल को भुनाने की तैयारी में जुट गई है। यही कारण है कि सुरक्षा बलों ने एक तरफ आतंकियों के खिलाफ आपरेशन शुरू किया, तो दूसरी तरफ केंद्र के वार्ताकार दिनेश्वर शर्मा घाटी पहुंच गए हैं, जहां वे विभिन्न वर्गो के साथ चल रही बातचीत को आगे बढ़ाएंगे।

Posted By: Vikas Jangra

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