नवीन नवाज, श्रीनगर। सेना, पुलिस और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) के बेहतर तालमेल ने कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकवाद की कमर तोड़कर रख दी है। इसका सबसे बड़ा फायदा कश्मीर में शांति बहाली में रोड़ा बन चुकी पत्थरबाजी पर लगाम लगाने में हुआ है। बड़े अलगाववादियों पर शिंकजे के साथ पत्थरबाजों की धरपकड़ और उनका वित्तीय नेटवर्क तबाह होने से अब कश्मीर में पत्थरबाजी मंद पड़ चुकी है। मस्जिदों से गूंजने वाले जिहादी तराने और भड़काऊ भाषण भी पत्थरबाजी की धार तेज करने में समर्थ नजर नहीं आ रहे हैं। घाटी में अब कहीं भी पत्थरबाज खुलेआम घूमते और जनजीवन को प्रभावित करते नहीं दिखते, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचते फिर रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले वर्ष कश्मीर घाटी में पत्थरबाजी की 2690 घटनाएं हुई थीं, लेकिन अनधिकृत सूत्रों की मानें तो यह संख्या 5000 से ज्यादा थी। वहीं, मौजूदा वर्ष में सितंबर के अंत तक करीब एक हजार पत्थरबाजी की घटनाएं हुई हैं।

राज्य पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 2017 की शुरुआत में पथराव की घटनाओं में कमी आ चुकी थी, लेकिन हालात देखकर सुरक्षा एजेंसियों को जून से अक्टूबर तक पथराव में तीव्र बढ़ोतरी की आशंका थी, और जो कुछ हद तक सही भी रही, लेकिन जुलाई के बाद इनमें कमी आई है। जुलाई तक पथराव की घटनाएं मुख्यत: दक्षिण कश्मीर में हुई और वह भी आतंकियों के सुरक्षाबलों की घेराबंदी में फंसने पर मस्जिदों से जिहादी तरानों व पथराव के एलान पर। पुलिस के अनुसार, अप्रैल में कश्मीर में संसदीय चुनाव थे और उसके बाद अगले तीन माह तक अलगाववादी भी सक्रिय रहे, लेकिन उसके बाद सेना का मिशन आलआउट और एनआइए की छापेमारी से हालात बदले।

अधिकतर नामी पत्थरबाज जेल में :

कश्मीर में नामी पत्थरबाजों में अब अधिकांश जेल में है, जो बचे हैं, वे भूमिगत हैं। इन पत्थरबाजों को पकड़ने के लिए पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के साथ स्थानीय लोगों की मदद भी ली। श्रीनगर के डाउन-टाउन में पत्थरबाजों का मुख्य सरगना सज्जाद गिलकारी मुठभेड़ में मारा गया, जबकि उसके छह अन्य साथी जेल में हैं। इसी तरह बारामुला में मीनाकुमारी और दक्षिण कश्मीर के नामी पत्थरबाज फलाही व बरकती भी जेल में हैं।

हवाला कारोबारियों पर कार्रवाई का असर : एनआइए की हवाला कारोबारियों के खिलाफ कार्रवाई से अलगाववादियों का वित्तीय नेटवर्क तबाह होने से पत्थरबाजी में कमी आई है। अलगाववादी खेमा जो पहले हर छोटी बात पर बंद का एलान करता था, अब इनसे बच रहा है और लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से सिर्फ सांकेतिक प्रदर्शनों का आह्वान कर रहा है।

खेल भी बना कारगर : पत्थरबाजी के गढ़ रहे चुके छोटे-छोटे कस्बों सोपोर, मागाम, शोपियां, त्राल, कुलगाम, लंगेट, हंदवाड़ा आदि में सुरक्षाबल युवाओं को खेल की तरफ प्रोत्साहित कर रहे हैं। साथ ही कश्मीर में सबसे लोकप्रिय खेल फुटबाल का आयोजन रात्रि में कर हालात को बेहतर बना रहे हैं।

2017 में पथराव की घटनाएं (राज्य गृह विभाग के आंकड़े)

जनवरी : 29

फरवरी : 34

मार्च : 76

अप्रैल : 191

मई : 190

जून : 171

जुलाई : 166

अगस्त : 102 घटनाएं

सितंबर : 50

(मौजूदा वर्ष के नौ माह में पथराव की लगभग एक हजार घटनाएं)

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Posted By: Gunateet Ojha

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