नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। प्रस्तावित नई शिक्षा नीति को लेकर इंतजार अब खत्म होगा। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इसे लेकर तैयारी लगभग पूरी कर ली है। इसे अब सिर्फ कैबिनेट से मंजूरी मिलना बाकी है। हालांकि शुरुआती ड्राफ्ट की तुलना में इनमें काफी बदलाव देखने को मिलेंगे। जिसमें इसके अमल को लेकर राज्यों को पूरी स्वायत्तता दी जा सकती है। वैसे तो मंत्रालय ने इस पूरी नीति को लागू करने की एक समयबद्ध योजना तैयार कर रखी है। जिसमें अगले पांच सालों में नई शिक्षा नीति को पूरी तरह से लागू करना शामिल है।

इस बीच नीति के अंतिम मसौदे को प्रकाशन के लिए भी भेज दिया गया है। मंत्रालय से जुड़े सूत्रों की मानें तो नीति के शुरूआती ड्राफ्ट में जो बड़े बदलाव किए गए है, उनमें स्कूल कॉम्प्लेक्स जैसे सुझावों को फिलहाल अनुपयोगी बताया गया है। साथ ही प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा आयोग की भूमिका को भी बदला गया है। इसकी अध्यक्षता अब मानव संसाधन विकास मंत्री करेंगे। पहले प्रधानमंत्री को इसका अध्यक्ष बनाने की सिफारिश की गई थी।

शिक्षकों के प्रशिक्षण पर दिया गया जोर

इसके अलावा नीति में स्कूली शिक्षा और उच्च शिक्षा के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजूबत बनाने और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है। वहीं निजी स्कूलों से 'पब्लिक' शब्द को हटाने की सिफारिश को यथावत रखा है। यानि निजी स्कूलों को अब अपने नाम से पब्लिक शब्द को हटाना ही होगा।

पीएमओ के साथ हुई लंबी चर्चा

प्रस्तावित नई शिक्षा नीति के शुरूआती ड्राफ्ट में यह सारे बदलाव लोगों से मांगे गए सुझावों और चर्चा के बाद ही किए गए है। सूत्रों के मानें तो इस ड्राफ्ट को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय के साथ भी लंबी चर्चा हो चुकी है। ऐसे में इसे अब सिर्फ कैबिनेट के सामने रखा जाना है। जिसकी मंजूरी के बाद इसे एक चरणबद्ध तरीके से देश भर में लागू किया जाएगा। हालांकि इसमें राज्यों को कुछ थोपा नहीं जाएगा, बल्कि उन्हें इसे नीति को लागू करने को लेकर प्रोत्साहित किया जाएगा। गौरतलब है कि प्रस्तावित नई शिक्षा नीति के शुरुआती ड्राफ्ट को पूर्व इसरो प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक के. कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में गठित एक कमेटी ने तैयार किया था।

Posted By: Dhyanendra Singh

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