हरिकिशन शर्मा, नई दिल्ली। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू होने पर तंबाकू उत्पादों पर भारी भरकम 290 प्रतिशत सैस लगाने का फैसला भले हो गया हो लेकिन गरीबों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बीड़ी इसके दायरे से बाहर रह सकती है। अधिकांश राज्य गरीबों की सेहत की चिंता छोड़ बीड़ी पर सैस न लगाने की वकालत कर रहे हैं। यही वजह है कि जीएसटी काउंसिल काउंसिल ने अब तक इस बारे में कोई निर्णय नहीं किया है। माना जा रहा है कि राज्यों के दबाव में बीड़ी को सैस के दायरे से बाहर रखा जा सकता है।

सूत्रों ने कहा कि जीएसटी काउंसिल की बैठकों में तंबाकू उत्पादों पर सैस की दर तय करते समय चर्चा के दौरान बिहार, केरल, पश्चिम बंगाल, पुद्दुचेरी, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने बीड़ी पर सैस न लगाने की वकालत की है। इन राज्यों की दलील है कि बीड़ी उद्योग में करीब बहुत से लोगों को रोजगार प्राप्त है और सैस लगने से इस पर विपरीत असर पड़ेगा। केरल सरकार ने तो बाकायदा पत्र लिखकर बीड़ी पर सैस न लगाने का आग्रह किया है। वहीं पश्चिम बंगाल की दलील है कि गरीब आदमी बीड़ी पीता है, इसलिए इस पर सैस नहीं लगना चाहिए। वहीं महाराष्ट्र ने भी आदिवासियों का हवाला देते हुए बीड़ी पर सैस न लगाने का तर्क दिया है।

सूत्रों के मुताबिक सिर्फ राजस्थान और कर्नाटक ही दो ऐसे राज्य हैं जिन्होंने बीड़ी पर सैस लगाने की मांग उठायी है। राजस्थान ने कहा कि बीड़ी गरीबों के लिए अधिक नुकसानदायक है, इसलिए इसे विशेष तवज्जो नहीं मिलनी चाहिए। कर्नाटक ने भी सिगरेट की तरह बीड़ी पर भी सैस लगाने की दलील देते हुए कहा कि गरीब आदमी को अगर बीड़ी पीने की लत से कैंसर हो जाता है तो वह अपना इलाज कराने में भी सक्षम नहीं होगा। दूसरी ओर दिल्ली ने बीड़ी पर सैस लगाने के पक्ष या विपक्ष में तर्क देने के बजाय काउंसिल को इस मुद्दे पर आगे चलकर फैसला लेने की बात कही है।

उल्लेखनीय है कि 'वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) विधेयक, 2017' में तंबाकू और विनिर्मित तंबाकू उत्पादों पर 290 प्रतिशत या प्रति हजार स्टिक पर 4,170 रुपये लगाने का प्रावधान किया गया है। तंबाकू उत्पादों पर यह सैस जीएसटी की उच्चतम दर 28 प्रतिशत के अलावा लगेगा। इस तरह विधेयक में सिगरेट और बीड़ी में अंतर नहीं किया गया है। हालांकि सूत्रों ने कहा कि राज्यों के रुख को देखते हुए जीएसटी काउंसिल ने फिलहाल बीड़ी पर सैस लगाने के संबंध में कोई स्पष्ट निर्णय नहीं किया है। सूत्रों ने कहा कि इस बात के पूरे आसार हैं कि बीड़ी को सैस के दायरे से बाहर रखा जाए।

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