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बोस्टन, पीटीआई। तकनीक के क्षेत्र में तरक्की के साथ इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या भी तेजी से बढ़ी है। बेकार उपकरण अक्सर ना विघटित होने वाले जहरीले कचरे में तब्दील हो जाते हैं। अब वैज्ञानिकों ने इससे निजात पाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने उपकरणों में इस्तेमाल के लिए ऐसा पॉलीमर बनाया है, जो बिना कचरा छोड़े विघटित हो जाता है। 

शोधकर्ता झेनान बाओ ने कहा, 'हम मनुष्य की त्वचा की कार्यप्रणाली को आधार बनाकर भविष्य के उपकरण बनाने की दिशा में शोध कर रहे हैं। त्वचा लचीली होती है। यह अपने घाव खुद भर लेती है और बिना कोई कचरा छोड़े पूरी तरह विघटित हो जाती है।'

बाओ ने बताया कि लचीला और दरार खुद भर लेने वाली तकनीक तो खोज ली गई थी, लेकिन पूर्ण विघटित हो सकने वाला उपकरण बनाना चुनौती था। अब इस चुनौती को भी पार कर लिया गया है। बाओ की टीम ने ऐसा लचीला इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बनाया है, जो सिरके जैसे कमजोर अम्ल के डालने से भी गल सकता है। अन्य शोधार्थी टिंग ली ने कहा कि यह सेमीकंडक्टिव पॉलीमर का पहला उदाहरण है, जो पूरी तरह विघटित हो सकता है। इस उपकरण में इलेक्ट्रॉनिक सर्किट भी आसानी से विघटित हो जाने वाले पॉलीमर से बने हैं।

बाओ ने बताया कि पारंपरिक पॉलीमर रसायन को देखते हुए ऐसा पदार्थ बनाना बड़ी चुनौती था, जो बिजली का सुचालक भी हो और आसानी से विघटित भी हो जाए। यह बड़ी उपलब्धि है। इस पर और काम करके भविष्य में इसकी मदद से अन्य जटिल इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी बनाने संभव हो सकते हैं। ऐसा संभव हुआ तो इलेक्ट्रॉनिक कचरे की मुश्किल से हमेशा के लिए निजात मिल जाएगी।

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Posted By: Pratibha Kumari

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