कानपुर [डॉ. राघवेंद्र चड्ढा]। शहर संसदीय सीट पर मोदी लहर के बावजूद डॉ. जोशी कड़े मुकाबले में फंसे हुए हैं। सपा-बसपा के पेंच और सहज उपलब्धता से जनता के बीच श्रीप्रकाश जायसवाल की मजबूत पकड़ उनके लिए मुश्किलें बढ़ा रही। बाहरी होने के ठप्पे और बार-बार क्षेत्र बदलने की कीमत भी चुकानी पड़ रही। हालांकि भाजपाई 'दागी है न दोषी है, कानपुर का सपूत जोशी है' और गंगा किनारे के शहर से करीबी रिश्ता उजागर कर माहौल को हवा दे रहे हैं।

गौरतलब है, देश में मोदी लहर का आंकड़ा काफी मजबूती से बढ़ा है पर शहर सीट में कुछ बाधाएं आ रहीं। यहां मोदी के खिलाफ जोशी के बयान, शहर में लगे होर्डिगों की इबारत बार-बार बदलने और पार्टी की अंदरूनी कलह डॉ.जोशी की राह में रोड़े अटका रही है। इसमें डॉ.जोशी का अल्मोड़ा, इलाहाबाद, बनारस के बाद अब कानपुर से चुनाव लड़ने से भी काफी हद तक चुनौती मिल रही है। कांग्रेस प्रत्याशी श्रीप्रकाश जायसवाल की 15 वर्षो से सबके बीच रहने की आदत, हर शनिवार व रविवार देश के किसी भी कोने से शहर का रुख व आम लोगों के लिए सहज उपलब्ध होने को बड़ी ताकत समझा जा रहा है।

वहीं, चुनौतियों से निपटने के लिए डॉ. जोशी के पक्ष में संघ ने प्रचारकों को मैदान में उतारा है, जो उनके बाहरी होने के आरोपों को खारिज करने के साथ कोयला मंत्री श्रीप्रकाश को भी केंद्र की यूपीए सरकार के कामकाज के जरिए कठघरे में खड़ा कर रहे हैं लेकिन राजनीति में परिवर्तन के प्रयास में डॉ.जोशी के पक्ष में माहौल बनाना बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। श्रीप्रकाश टीम डॉ.जोशी की इन्हीं कमजोरियों का फायदा उठाकर शहर के आखिरी छोर तक के व्यक्ति तक पहुंच बनाने में कारगर हो रही है। हालांकि अब इन दिनों पूर्व में शहर सीट से चुनाव लड़ चुके भाजपा विधायक सतीश महाना भी भाजपा, संघ व अनुषंगिक संगठनों से इतर पुराना नेटवर्क खड़ा कर दिया है। वह खुद पर लग रहे भितरघात के आरोपों को धोने की जुगत में टीम के साथ तगड़ी मेहनत कर रहे हैं। ये प्रयास डॉ.जोशी के लिए काफी हद तक फायदेमंद हो सकता है। वहीं, जोशी की मजबूत टीम भी अहम हिस्सा साबित हो रही। ये टीम शहर के भाजपाइयों से इतर लोगों के बीच मजबूती से पैठ बना रही है। वैसे, नतीजा चाहे जो भी हो पर पूर्व के मैनचेस्टर की पहचान वाले महानगर में में चुनावी जंग का परिणाम अप्रत्याशित होगा।

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