[डॉ. जयंतीलाल भंडारी]। पिछले दिनों दुनिया में रोजगार के संभावित परिदृश्य से संबंधित दो महत्वपूर्ण वैश्विक रिपोर्ट प्रकाशित हुई हैं। इनको देखकर लगता है कि भारत की कौशल युवा आबादी के लिए दुनिया के अनेक देशों में रोजगार की उजली संभावनाएं बन सकती हैं। भारत अपनी प्रशिक्षित युवा आबादी को श्रमशक्ति की कमी से जूझ रहे जापान, कनाडा, पुर्तगाल, स्वीडन, जर्मनी, नॉर्वे, इटली आदि देशों में भेजकर वैश्विक रोजगार के अवसरों का फायदा उठा सकता है।

वैश्विक रिपोर्टें प्रकाशित

पिछले दिनों दुनिया में रोजगार के संभावित परिदृश्य से संबंधित दो महत्वपूर्ण वैश्विक रिपोर्टें प्रकाशित हुई हैं, जिन पर निश्चित ही गौर किया जाना चाहिए। इनको देखकर लगता है कि भारत की कौशल-युक्त युवा आबादी के लिए दुनिया के अनेक देशों में रोजगार की उजली संभावनाएं बन सकती हैं। दुनिया के ख्याति प्राप्त मानव संसाधन परामर्श संगठन कॉर्न फेरी द्वारा 7 मई को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2030 तक विश्व के 19 विकसित और विकासशील देशों में 8.52 करोड़ कुशल कामगारों की कमी होगी, वहीं भारत इकलौता ऐसा देश होगा जिसके पास 24.5 करोड़ अतिरिक्त कामगार होंगे।

मैनपावर की कमी

जाहिर है, भारत अपनी प्रशिक्षित युवा कार्यक्षम आबादी को मैनपावर की कमी से जूझ रहे जापान, कनाडा, पुर्तगाल, स्वीडन, जर्मनी, नॉर्वे, इटली, ग्रीस, दक्षिण कोरिया, स्पेन, पोलैंड, डेनमार्क, स्विट्जरलैंड आदि देशों में भेजकर वैश्विक रोजगार अवसरों का फायदा उठा सकता है।

भारत के लिए अवसर

इसी तरह विश्व बैंक की वैश्विक रोजगार से संबंधित हालिया रिपोर्ट भी कहती है कि दुनिया के अधिकांश विकसित व विकासशील देशों में कामकाजी आबादी कम हो रही है। ऐसे में इन देशों में भारत के कुशल युवाओं की मांग बढ़ सकती है। भारत की आधी आबादी की उम्र पच्चीस साल से कम है और 65 प्रतिशत आबादी 35 साल से कम आयु की है। ऐसे में भारत की युवा आबादी कौशल प्रशिक्षित होकर मानव संसाधन के परिप्रेक्ष्य में दुनिया के लिए उपयोगी और भारत के लिए आर्थिक कमाई का प्रभावी साधन सिद्ध हो सकती है।

तकनीकी पेशेवरों की बढ़ती मांग

यद्यपि एक ओर अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे कुछ देश वीजा-संबंधी नियमों को कठोर बनाकर विदेशी (खासकर भारतीय) प्रोफेशनल्स के बढ़ते कदमों को रोकना चाह रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जापान जैसे कई देशों में भारतीय प्रतिभाओं का स्वागत हो रहा है। हाल ही में जापान के उद्योग व व्यापार को बढ़ावा देने वाली सरकारी एजेंसी जापान विदेश व्यापार संगठन (जेईटीआरओ) ने कहा कि जापान की औद्योगिक व कारोबार जरूरतों में तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल तेज होने की वजह से सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) के साथ ही स्वास्थ्य सेवा, कृषि, शोध और विकास, सेवा व वित्त जैसे कई अन्य क्षेत्रों में कौशल-युक्त कार्यबल की भारी कमी महसूस की जा रही है।

आइटी पेशेवरों की जरूरत

जीईटीआरओ ने कहा है कि खासतौर से आइटी पेशेवरों की सबसे अधिक जरूरत है। यह भी कहा गया कि भारत जापान में अपने प्रतिभाशाली आइटी प्रोफेशनल्स भेजकर इस कमी को दूर कर सकता है। जापान में फिलहाल 9.20 लाख आइटी पेशेवर हैं और अब भारत से दो लाख आइटी पेशेवरों की पूर्ति हेतु कार्ययोजना बनाई गई है। यह भी छोटी बात नहीं है कि जापान ने इसी साल जनवरी से भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए वीजा नियमों को आसान कर दिया है। जापान सरकार उच्च प्रशिक्षित पेशेवरों के लिए खास तरह का ग्रीन कार्ड जारी कर रही है, जिसके आधार पर उन्हें एक साल में स्थाई निवास के लिए प्रमाण पत्र मिल सकेगा।

बेंगलुरु बनेगा आइटी हब

यहां यह भी उल्लेखनीय है कि विश्व बैंक ने भारत की आइटी संभावनाओं पर केंद्रित नई रिपोर्ट में कहा है कि जिस तरह अमेरिका की सैनजोस सिलिकॉन वैली ने पूरी दुनिया में सबसे बड़े आइटी हब के रूप में पहचान बनाई है, भारत वैसी ही सिलिकॉन वैली आगामी पांच साल में स्थापित करने की संभावनाएं रखता है। वैश्विक संगठन मैकिंसे की नई अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार बेंगलुरु वर्ष 2020 तक सिलिकॉन वैली को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा आइटी क्लस्टर होगा।

कंपनियों का हब

इस समय भारत का बेंगलुरु आइटी, स्टार्टअप, वेंचर कैपिटल और रक्षा कंपनियों का हब है। दुनिया की शीर्ष 105 कंपनियों के 7 लाख से ज्यादा पेशेवर यहां काम करते हैं। ख्याति प्राप्त स्टाफिंग फर्म मैनपावर गु्रप की स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में उद्योग-कारोबार के लिए पर्याप्त संख्या में टैलेंटेड प्रोफेशनल्स नहीं मिल रहे हैं। स्टडी रिपोर्ट में कहा गया है कि रोजगार बाजार की नई जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित युवाओं की देश-दुनिया में भारी मांग है। आइटी, मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ, अकाउंटिंग इत्यादि में पेशेवर दक्षता रखने वाले युवाओं की मांग बढ़ती जा रही है।

दमदार प्रदर्शन

नि:संदेह अपने सस्ते-दक्ष श्रमबल के कारण चीन बीते कई वर्षों से आर्थिक विकास के मोर्चे पर दमदार प्रदर्शन कर रहा है, लेकिन अब सस्ते श्रमबल की कमी उसके लिए चुनौती बनती जा रही है, वहीं हमारे यहां सस्ते श्रम की बढ़ती उपलब्धता भारत के लिए नए अवसर पैदा कर रही है। लेकिन सस्ते भारतीय श्रम को देश और दुनिया की रोजगार जरूरतों के मुताबिक कौशल-युक्त बनाना जरूरी है।

युवाओं को हुनरमंद बनाने पर जोर

यदि हम चाहते हैं कि भारत अपनी प्रतिभाओं, अपने कुशल-प्रशिक्षित श्रमबल से आर्थिक व औद्योगिक विकास की नई इबारत लिखे तो हमें कुछ महत्वपूर्ण कदम उठाने होंगे। हमें रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रमों को बढ़ावा देते हुए युवाओं को हुनरमंद बनाने पर जोर देना होगा। वहीं दूसरी ओर गांवों में काफी संख्या में जो गरीब, अशिक्षित और अद्र्धशिक्षित लोग हैं, उन्हें अर्थपूर्ण रोजगार देने के लिए प्रशिक्षित करके निम्न तकनीक विनिर्माण में लगाना होगा। इसी तरह उच्च शिक्षा की ओर बढ़ रही हमारी नई पीढ़ी को देशी-विदेशी रोजगार बाजार की जरूरतों के अनुरूप कुशल मानव संसाधन के रूप में तैयार करना होगा।

नैस्कॉम की भूमिका

यह जरूरी है कि सरकार द्वारा कौशल प्रशिक्षण को दी जा रही प्राथमिकता के नतीजे धरातल पर दिखाई दें। युवाओं को नए दौर की कुशलताओं से लैस किया जाए। इस परिप्रेक्ष्य में पिछले दिनों इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना-प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने तकनीकी क्षेत्र की कंपनियों के संगठन नैस्कॉम के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), वर्चुअल रियलिटी, रोबोटिक प्रोसेस ऑटोमेशन इंटरनेट ऑफ थिंग्स, बिग डाटा एनालिसिस, 3डी प्रिटिंग, क्लाउड कम्प्यूटिंग, सोशल मीडिया-मोबाइल जैसे आठ नए तकनीकी क्षेत्रों में 55 नई भूमिकाओं में 90 लाख युवाओं को अगले तीन साल में प्रशिक्षित करने का जो अनुबंध किया है, उसे कारगर तरीके से क्रियान्वित किया जाना जरूरी है।

नैस्कॉम द्वारा दी गई समयसीमा

अनुबंध के तहत नैस्कॉम द्वारा दी गई समयसीमा के पहले चरण में 40 लाख तथा दूसरे चरण में 50 लाख युवाओं को तकनीकी क्षेत्र में उद्यमिता और नौकरी की नई जरूरतों के मुताबिक प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। बेहतर होगा कि नैस्कॉम इस कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए विश्व के बेहतरीन प्रशिक्षकों और विषय-वस्तु मुहैया कराने वाली और वैश्विक स्तर की विभिन्न संस्थाओं से सहयोग ले ताकि ऐसी भारतीय प्रतिभाएं निखरकर सामने आएं, जो देश-दुनिया में अपनी चमक फैलाने में सक्षम हों।

हम उम्मीद करें कि रोजगार संबंधी

विभिन्न वैश्विक रिपोर्टों के मद्देनजर सरकार उद्योग-कारोबार एवं तकनीकी क्षेत्रों से जुड़े संगठनों का सहयोग लेकर देश और दुनिया की जरूरतों के मुताबिक हमारी युवा आबादी को जरूरी कौशल से लैस करने के अभियान को गति देगी।

[लेखक अर्थशास्त्री हैं ] 

Posted By: Sanjay Pokhriyal