सोनिया गांधी ने किया इंस्टाग्राम डेब्यू, एक ही दिन में 1 लाख से अधिक फॉलोअर्स
सोनिया गांधी ने अपनी आत्मकथा 'बिलांगिंग: ए जर्नी ऑफ लव' के साथ इंस्टाग्राम पर डेब्यू किया।

सोनिया गांधी ने इंस्टाग्राम पर अपनी आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग': ए जर्नी ऑफ लव' लॉन्च की

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संजय मिश्र, नई दिल्ली। संवाद के नए दौर में भी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से अब तक दूर रहीं कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने गुरूवार को अंतत: इंस्टाग्राम के जरिये आखिरकर इस माध्यम पर अपनी पहल दस्तक दी।
अगले महीने आने वाली अपनी चर्चित आत्मकथा 'बिलॉन्गिंग': ए जर्नी ऑफ लव' की झलक दिखाते हुए उन्होंने पहली बार किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म को सीधे संवाद का जरिया बनाया।
नई पीढ़ी के युवाओं में संचार-संवाद के लिए लोकप्रिय इंस्टाग्राम पर अपनी किताब लेकर रूबरू हुईं सोनिया गांधी की इस प्लेटफार्म पर इंट्री धमाकेदार रही और कुछ घंटों में ही उनके फॉलोअर्स की संख्या एक लाख पार कर गई।
सोनिया गांधी ने किया इंस्टाग्राम डेब्यू
इंस्टा पर पहले पोस्ट में अपनी प्रकाशित हो रही आत्मकथा का जिक्र करते हुए सोनिया गांधी ने कहा 'नमस्ते। आज आप सभी के साथ यह पल बांटते हुए मैं दिल से आभारी हूं।
यह है ‘बिलॉन्गिंग': अ जर्नी ऑफ लव’ की पहली झलक। यह कहानी है प्रेम की, कर्तव्य की, दर्द की और अपनेपन की तलाश की। इसे आप सभी तक पहुंचाने का बेसब्री से इंतजार है।'
इस पोस्ट के साथ कांग्रेस नेता ने पुस्तक के प्रकाशकों द्वारा उन्हें किताब की प्रति सौंपे जाने के पल का वीडियो भी साझा किया है। प्रकाशकों के साथ कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा भी अपनी मां को इस मौके पर मुंह मीठा कराते हुए वीडियो में नजर आ रही हैं।
सोनिया गांधी के इंस्टा पर आने के तुरंत बाद राहुल गांधी और प्रियंका समेत कांग्रेस के कई बड़े नेताओं ने उनके अकाउंट को फॉलो किया। कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम ने पोस्ट साझा करते हुए कहा कि सोनिया गांधी का बहुप्रतीक्षित संस्मरण 10 नवंबर को आ जाएगा।
10 नवंबर को हार्परकालिंस इंडिया करेगी प्रकाशित
मालूम हो कि सोनिया गांधी की आत्मकथा प्रकाशित करने को लेकर पहले तय प्रकाशक पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से विवाद के बाद नए प्रकाशक हार्परकालिंस इंडिया ने पिछले महीने इसे हमारे समय के सबसे बहुप्रतीक्षित राजनीतिक संस्मरणों में से एक बताते हुए 10 नवंबर को इसे लाने की घोषणा की थी।
विवाद इसलिए हुआ कि पेंगुइन ने संस्मरण के कुछ मूल अंशों को संपादित करने और हटाने की मांग रखी मगर सोनिया गांधी ने इससे इनकार कर दिया।
इसके बाद पेंगुइन ने पुस्तक के भारतीय संस्करण को प्रकाशित करने से पीछे हटने की घोषणा कर दी मगर लेखक से गोपनीयता के अनुबंध का हवाला देते हुए प्रकाशन से पीछे हटने के कारणों का खुलासा करने से मना कर दिया।सोनिया गांधी की ओर से भी इस संदर्भ में किसी तरह की टीका-टिप्पणी नहीं की गई।
हालांकि कांग्रेस ने जरूर सरकार के दबाव में प्रकाशक के पीछे हटने का दावा करते हुए सेंसरशिप का आरोप लगाया और इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर पहरे का प्रयास करार दिया।
