सुरेंद्र प्रसाद सिंह, नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते लागू देशव्यापी लॉकडाउन के मुश्किल वक्त में भी कुछ राज्यों को अपनी पसंद दाल चाहिए, जिसकी उन्होंने फरमाइश भी कर दी है। दिलचस्प है कि जिन उत्तरी राज्यों ने प्रीमियम दालों की मांग रखी है, उन्होंने कभी पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम ( पीडीएस ) पर दाल नहीं बांटी है। ऐसे राज्य हमेशा दाल बांटने को जहमत बताकर पल्ला झाड़ते रहे हैं। इसमें भी कई राज्यों ने साबुत दलहन लेने के बजाय तैयार दालों की मांग रखी हैं।

नैफेड के गोदामों में 32 लाख टन दालों का बफर स्टॉक

फिलहाल राहत की बात यही है कि केंद्रीय सरकारी एजेंसी नैफेड के गोदामों में तकरीबन 32 लाख टन दालों का बफर स्टॉक है, जो जरूरत से बहुत अधिक है। लॉकडाउन से उपभोक्ताओं को राहत पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना शुरू की है, जिसमें गेहूं, चावल के साथ दाल देने का भी प्रावधान किया गया है। 

कई राज्यों ने मांगी प्रीमियम दालें

अनाज व दालों का पर्याप्त स्टॉक है, जो बांटने के काम आ जाएगा। पीडीएस की जरूरतों के बाबत केंद्र ने राज्यों के साथ पिछले सप्ताह सभी राज्यों के मुख्य सचिवों से वीडियो कांफ्रेंसिंग की, जिसमें उनकी दालों की जरूरत के बारे में पूछा गया। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जहां चना दाल खाने की परंपरा है, वहां की सरकारों ने केंद्र से इसकी जगह प्रीमियम कही जाने वाली मूंग व उड़द की दाल मांगी। आमतौर पर दालों के बफर स्टॉक से जब भी जरूरत हुई तो दक्षिणी राज्यों ने समय-समय पर दालों का उठाव किया, लेकिन उत्तरी राज्य इसे जहमत मानते हुए इससे बचते रहे। नैफेड के पास फिलहाल दालों का जो स्टॉक है, उसका आधा हिस्सा चना है।

पुराना स्टॉक खाली करना जरूरी

सूत्रों ने बताया कि आगामी रबी खरीद सीजन चालू होते ही चना और मसूर की खरीद फिर चालू होने वाली है, जिसके लिए पुराना स्टॉक खाली करना जरूरी हो गया है। ऐसे में केंद्र सरकार अप्रैल, मई और जून के लिए पीडीएस पर साबुत चना बांटने का फैसला ले सकती है। हालांकि दाल मिलों की नजर इस पुराने स्टॉक पर बनी हुई है, जिसे वो औने-पौने भाव पर लेना चाहेंगी। राशन दुकानों से बांटने के लिए प्रति परिवार एक किलो दाल देने का प्रावधान किया गया है, जिसके लिए कुल 2.1 लाख टन दालों की जरूरत होगी। तीन महीनों के लिए कुल जरूरत 6.30 लाख टन होगी। 

गरीबों के लिए चना मुफीद

अरहर ( तुअर ) को छोड़कर बाकी दालें चना, मसूर, उड़द और मूंग साबुत भी खायी जाती हैं। साबुत दलहन से दालें बनाने में समय के साथ लागत बढ़ जाएगी। गरीब उपभोक्ता के लिए चना सबसे मुफीद साबित हो सकता है, जिसे कच्चा, भिगोकर, सब्जी, बेसन, रोटी और न जाने के कितने तरीके से उपयोग में लाया जा सकता है। चना, उड़द और मूंग का सबसे ज्यादा स्टॉक मध्य प्रदेश और राजस्थान की विभिन्न उत्पादक मंडियों के इर्द--गिर्द है। चना और अरहर का स्टॉक आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक में है। मसूर का ज्यादा स्टॉक उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में है। 

पीडीएस के तहत अतिरिक्त अनाज देने का फैसला

राशन प्रणाली के माध्यम से ज्यादातर हिस्सों में चना ही वितरित किया जा सकता है। इसी दौरान नैफेड ने खुले बाजार में भी दालों की बिक्री का टेंडर जारी कर दिया है, ताकि सरकारी गोदामों से दालों का पुराना स्टॉक खाली हो सके। देश के 21 करोड़ परिवार जो पीडीएस में लाभार्थी उपभोक्ता हैं, उन्हें निर्धारित मात्रा में मिल रहे अनाज के साथ पांच किलो अतिरिक्त अनाज देने का फैसला किया गया है। इसके साथ प्रति परिवार एक किलो दाल दी जाएगी।

Posted By: Bhupendra Singh

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