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    भारत समेत दुनियाभर में छह हजार विमानों की उड़ान पर खतरा, हजारों फ्लाइट प्रभावित; सूरज बना कारण

    Updated: Sun, 30 Nov 2025 02:00 AM (IST)

    कंपनी ने दुनियाभर में संचालित करीब छह हजार विमानों के सॉफ्टवेयर अपडेट का आदेश जारी किया है और अस्थायी रूप से इनके उड़ान संचालन पर रोक लगा दी है। एयरबस के 55 वर्ष के इतिहास में पहली बार इतना बड़ा तकनीकी हस्तक्षेप किया गया है। सभी प्रभावित विमानों में तत्काल मरम्मत की अनिवार्यता घोषित की।

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    सौर विकिरण से एयरबस के छह हजार विमानों पर खतरा (फोटो- पीटीआई)

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। गंभीर सौर विकिरण के कारण दुनिया में सबसे लोकप्रिय एयरबस ए320 श्रृंखला के विमानों में सॉफ्टवेयर खराबी का खतरा बढ़ गया है। यह गड़बड़ी उड़ान नियंत्रण से जुड़े अहम डाटा को प्रभावित कर सकती है, जिससे विमान की ऊंचाई, दिशा और नियंत्रण जैसी महत्वपूर्ण गणनाएं गलत हो सकती हैं।

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    छह हजार विमानों के सॉफ्टवेयर अपडेट का आदेश

    कंपनी ने दुनियाभर में संचालित करीब छह हजार विमानों के सॉफ्टवेयर अपडेट का आदेश जारी किया है और अस्थायी रूप से इनके उड़ान संचालन पर रोक लगा दी है। एयरबस के 55 वर्ष के इतिहास में पहली बार इतना बड़ा तकनीकी हस्तक्षेप किया गया है।

    फ्रांसीसी विमान निर्माता एयरबस ने बताया कि सौर विकिरण सॉफ्टवेयर संस्करण एल104 वाले एलिवेटर-एइलरान कंप्यूटर (ईएलएसी बी) को प्रभावित कर रहा है। यह कंप्यूटर विमान की ऊंचाई की गणना और उड़ान सतहों के नियंत्रण का महत्वपूर्ण कार्य करता है।

    इसी कारण यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (ईएएसए) ने शुक्रवार को इमरजेंसी एयरवर्दीनेस डायरेक्टिव (ईएडी) जारी करते हुए सभी प्रभावित विमानों में तत्काल मरम्मत की अनिवार्यता घोषित की।

    फ्लोरिडा में आपात लैंडिंग से सामने आया मामला

    30 अक्टूबर को कैनकन-नेवार्क उड़ान के दौरान जेटब्लू एयरवेज की फ्लाइट (बी6-1230) अचानक 35 हजार फीट की ऊंचाई से नीचे आने लगी। इस घटना में 15 यात्री घायल हुए और विमान को टांपा, फ्लोरिडा में आपातकालीन लैंडिंग करानी पड़ी।

    जांच में पाया गया कि सौर विकिरण के कारण ईएलएसी डाटा में आई गड़बड़ी से विमान का नियंत्रण प्रभावित हुआ था। हालांकि 'ऑटोपायलट' सिस्टम ने समय रहते विमान को स्थिर ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

    एयरबस का कहना है कि ऐसी दूसरी कोई घटना सामने नहीं आई, लेकिन विश्लेषण से ए320सीईओ और ए320एनईओ श्रेणी के विमानों में व्यापक खतरे की पुष्टि हुई है।

    “फ्लाई-बाय-वायर'' तकनीक पर भी असर

    320 विमानों में फ्लाई-बाय-वायर तकनीक का उपयोग होता है, जिसमें काकपिट से भेजे गए इलेक्ट्रानिक सिग्नल ईएलएसी जैसे कंप्यूटरों द्वारा प्रोसेस किए जाते हैं और इसके आधार पर एलिवेटर व एइलरान सतहें समायोजित होती हैं। सॉफ्टवेयर में छोटी सी त्रुटि भी उड़ान नियंत्रण प्रणाली को प्रभावित कर सकती है।

    सौर विकिरण से खतरे क्यों बढ़ रहे हैं

    सौर विस्फोट के दौरान सूर्य से निकलने वाले आवेशित कण कुछ ही मिनटों में पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल तक पहुंच जाते हैं। हाई एल्टीट्यूड पर उड़ने वाले विमानों में ये कण इलेक्ट्रानिक उपकरणों पर प्रभाव डाल सकते हैं। ईएलएसी का एल104 सॉफ्टवेयर इस तरह के विकिरण के प्रति अधिक संवेदनशील पाया गया है, जिसके चलते ऊंचाई गणना में त्रुटि और उड़ान सतहों का असामान्य व्यवहार संभव है।

    उपाय

    सॉफ्टवेयर डाउनग्रेड या हार्डवेयर रिप्लेसमेंट

    रिपोर्टों के अनुसार, एयरलाइंस को ईएलएसी साफ्टवेयर को पुराने, अधिक स्थिर एल103 संस्करण पर वापस लाना होगा या संबंधित हार्डवेयर में बदलाव करना होगा। पूरा अपडेट लगभग तीन घंटे में पूरा हो सकता है।

    सौर गतिविधि चरम पर

    विशेषज्ञों के अनुसार सूर्य की गतिविधि हर 11 वर्ष में अधिकतम स्तर पर पहुंचती है। वर्तमान चक्र में विकिरण संबंधी घटनाओं में तेजी आई है, जिससे ऊंचाई पर संचार और नेविगेशन सिस्टम में व्यवधान भी बढ़ रहा है। वैमानिकी क्षेत्र अब विकिरण-प्रतिरोधी तकनीक, कवचयुक्त प्रोसेसर और रियल-टाइम सौर अलर्ट सिस्टम जैसे समाधानों पर जोर दे रहा है।